मैनपुरी। नवीन मंडी में फसल बेचने के लिए पहुंचने वाले किसानों से करदा के साथ ही एक मुद्दत काटी जा रही थी। प्रशासन ने इसे बंद कराया तो व्यापारियों ने मंडी में खरीद ही बंद कर दी। मंगलवार को पूरे दिन मंडी में किसानों का हजारों क्विंटल धान लगा रहा, लेकिन व्यापारियों ने खरीद ही नहीं की।
नवीन मंडी में धान की बिक्री पर प्रति क्विंटल आधा किलो करदा और कुल कीमत का एक प्रतिशत मुद्दत के रूप में काटा जा रहा था। लंबे समय से किसान इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग सका। हाल ही में जब डीएम महेंद्र बहादुर सिंह के संज्ञान में ये प्रकरण आया तो उन्होंने करदा और कटौती बंद कराने के मंडी सचिव और एसडीएम को सख्त आदेश दिए। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई किसान से कटौती करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके चलते आढ़तियों ने कटौती करने से साफ इन्कार कर दिया। इस आदेश के बाद मंगलवार को मंडी में किसान भी आए थे, आढ़ती भी थे, लेकिन व्यापारी धान खरीदने नहीं आए। क्योंकि ये कटौती कहीं न कहीं व्यापारियों द्वारा ही की जाती है। व्यापारी जब आढ़तियों का एक प्रतिशत काटकर भुगतान करते हैं तो आढ़ती भी किसान को कटौती कर भुगतान करता है। व्यापारियों द्वारा मंडी में खरीद न किए जाने से सैकड़ों किसानों का धान मंडी में पड़ा रहा। मंडी प्रशासन को भी इसकी सूचना दी गई, लेकिन मंडी प्रशासन भी कुछ नहीं कर सका। जिस मंडी में हजारों क्विंटल धान की बिक्री होती थी वहां मंगलवार को एक दाना तक नहीं बिका।
25 हजार बोरी धान की होती है बिक्री
जिले में धान की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। इसके चलते नवीन मंडी में बिक्री भी अच्छी होती है। औसतन मंडी में हर रोज 25 हजार बोरी धान की बिक्री होती है। इससे केवल किसानों की ही रोजी रोटी नहीं चलती बल्कि पांच सौ आढ़ती भी मुनाफा कमाते हैं। लेकिन बिक्री ठप होने के चलते पूरी मंडी में धान के ढेर लगे रहे।
कहां जाएगा किसानों का धान
व्यापारियों द्वारा धान न खरीदने के चलते किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। जिन किसानों का धान मंडी में पड़ा हुआ है, वे उस धान को कहां ले जाएं। इतना ही नहीं उन्हें काम छोड़कर मंडी में उस धान की रखवाली करनी पड़ रही है। ऐसी सर्दी में रात में भी उन्हें मंडी में खुले आसमान के नीचे ही बैठना होगा। उन्हें उस गलती की सजा भुगतनी होगी, जो उन्होंने की ही नहीं।
कैसे पलेगा पल्लेदारों का पेट
नवीन मंडी में एक हजार से अधिक पल्लेदार काम करते हैं। ये पल्लेदार रोजाना धान की तौल के साथ-साथ लोडिंग अनलोडिंग का काम करते हैं। इनमें से अधिकांश गैर प्रदेशों के हैं। मंडी में मंगलवार को धान की बिक्री न होने से उन्हें भी काम नहीं मिल सका। अगर मंडी में बुधवार को भी बिक्री न हुई तो पल्लेदारों के सामने पेट पालने का भी संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों की बात
हमेशा से ही किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है। पहले आढ़ती कटौती बंद करने को तैयार नहीं थे, अब वे तैयार हैं तो व्यापारी तैयार नहीं हैं।
केपी सिंह, नगला सिकरवार।
प्रशासन द्वारा कटौती बंद करने का आदेश तो दे दिया गया, लेकिन जब खरीद ही नहीं होगी तो किसानों को क्या फायदा। इस पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
सर्वेंद्र, नगला मोती।
मंडी प्रशासन को पहले ही इस पर सख्त निर्णय लेना चाहिए। जब कटौती की शुरुआत हुई थी तभी इसे रोक दिया जाता तो उसे आज ये नौबत ही नहीं आती।
ओमकार, नगला धनी।
प्रशासन को इस बात पर विचार करना चाहिए आखिर किसानों का शोषण क्यों नहीं रुक पा रहा है। व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
सुरेश कुमार, जरामई।
आढ़तियों की बात
आढ़ती हमेशा से ही किसानों के हित के लिए कार्य करते आए हैं। अगर मिलर्स और व्यापारी कटौती नहीं करते हैं तो किसान से कोई भी कटौती नहीं की जाएगी।
मोहित कुमार, आढ़ती।
किसान की फसल की बिक्री में आढ़ती को दो प्रतिशत कमीशन लेता है। इसमें से भी जब मिलर्स एक प्रतिशत काट लेंगे तो मंडी खर्च का क्या होगा।
वोट सिंह यादव, आढ़ती।
प्रशासन द्वारा लगातार कटौती को लेकर आढ़तियों पर ही दबाव बनाया जा रहा है। कई बार प्रशासन को भी मिलर्स द्वारा कटौती की जानकारी दी जा चुकी है।
जनार्दन गुप्ता, आढ़ती।
आढ़तियों ने निर्णय लिया है कि वे किसी प्रकार की कटौती और करदा नहीं लेंगे। अब प्रशासन को व्यापारी और मिलर्स पर कार्रवाई करनी होगी।
आदेश कुमार गुप्ता, आढ़ती।