ब्रज की होली दुनियाभर में जानी जाती है। होली के पर्व पर यहां सदियों पुरानी लीलाएं जीवंत हो जाती हैं। 40 दिन तक रंगोत्सव मनाया जाता है। हर दिन कार्यक्रम होते हैं। इनमें भक्त प्रह्लाद की लीला भी शामिल हैं, जो हर वर्ष मथुरा के गांव फालैन में होती है। गांव फालैन में होली पर एक पंडा धधकते हुए अंगारों पर चलता है। इसके लिए पंडा ने एक महीने पहले से ही तप शुरू कर दिया है।
गांव फालैन में प्रह्लाद और होलिका दहन की पौराणिक गाथा की परंपरा एक बार फिर जीवंत होगी। होलिका के दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की अग्निपरीक्षा देने को मोनू पंडा बुधवार से एक माह के कठोर तप पर बैठ गया है। होलिका दहन के दिन जब दीपक की लौ उसकी हथेली को शीतलता का एहसास कराएगी तब पंडा के कदम होलिका की लपटों को चीरते हुए आगे बढ़ जाएंगे।
गांव में है प्रह्लाद का मंदिर
गांव फालैन को प्रह्लादनगरी के नाम से जाना जाता है। इस बार भी मोनू पंडा बुधवार को पूर्णिमा के दिन सुबह गांव की परिक्रमा लगाकर प्रह्लाद मंदिर पर तप पर बैठ जाएगा। होलिका की लग्न निर्धारित होने के बाद आसपास के सात गांव मिलकर प्रहलाद मंदिर के पास विशाल होलिका तैयार करेंगे।