छह गवाह कोर्ट में किए गए पेश
28 जनवरी 2017 को किशोर न्यायालय (किशोर न्याय बोर्ड) ने आरोपी का विचारण वयस्क अपराधी के रूप में किए जाने के लिए पत्रावली विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट की कोर्ट में भेज दी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक विमिलेश आनंद ने वादी मुकदमा, उसके पिता और चिकित्सक डॉ. ममता किरन सहित छह गवाह कोर्ट में पेश किए।
पीड़िता के दादा ने पुलिस को पूर्व में आरोपी के खिलाफ बयान दिया था। मगर, कोर्ट में बयान से मुकर गए। उन्होंने बयान में कहा कि सचिन पूरे गांव का होशियार लड़का है। सचिन बिटिया को उन्हें गोद में दे रहा था। तभी बच्ची बकरी बांधने के खूंटे पर गिर गई, जिससे उसके चोट लग गई। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी और स्वतंत्र गवाह भी नहीं था।
आरोपी का कृत्य दिल दहलाने वाला है : कोर्ट
विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट ने महिला चिकित्सक की रिपोर्ट और उनके बयान के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि अभियुक्त ने 10 माह की अबोध बच्ची से दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य किया। आरोपी का यह कृत्य दिल दहला देने वाला है। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उसका कृत्य समाज में भय उत्पन्न करने वाला है।
आरोपी बच्ची को खिलाने ले जाता था। उसका कृत्य अक्षम्य है। उसके अपराध को देखते हुए कड़ी से कड़ी सजा का पात्र है। कोर्ट ने दोषी को धारा 377 और पोक्सो एक्ट के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा होने पर धनराशि पीड़िता को दिलाने के आदेश किए। एक लाख प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करने के आदेश किए हैं।