मकर संक्रांति के लिए सज गया पतंगों का बाजार
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मकर संक्रांति नजदीक है, ऐसे में पतंगबाजों का उत्साह बढ़ गया है। वैसे तो दशहरे पर भी आगरा में पतंग उड़ाई जाती है, लेकिन मकर संक्रांति पर अपनी अलग रौनक होती है। पतंग, मांझा, सद्दा खरीद लिए गए हैं। गुरुवार को ताजनगरी के आसमान में डेढ़ लाख पतंगों से सतरंगी छटा छाएगी। पतंगों के बाजार के रूप में प्रसिद्ध माल का बाजार के कारोबारियों का कहना है कि धंधे में चमक पहले जैसी तो नहीं है लेकिन इतनी बिक्री होने की उम्मीद है।
मंगलवार को माल का बाजार में पतंगबाजों की भीड़ रही। कारोबारी आरिफ ने बताया कि त्योहार को लेकर बीते कुछ दिनों से अच्छी खरीदारी चल रही है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी काफी खपत होती है। सीजन में अनुमानित 80 लाख रुपये का कारोबार होता है।
इधर, अकेले शहर में ही डेढ़ लाख पतंगों की बिक्री की उम्मीद है। हालांकि बीते 10 वर्षों में पतंगबाजी का शौक आधा रह गया है। पहले तीन लाख तक बिक्री हो जाती थी। शहर में शाहगंज, लोहामंडी, बोदला के क्षेत्र में सबसे ज्यादा पतंगबाजी होती है।
कार्टून वाली पतंग बच्चों की पसंद
कार्टून करैक्टर के चित्र वाली पतंगें बच्चों को सबसे अधिक पसंद हैं। कारोबारियों के मुताबिक इसमें भी पन्नी (पॉलिथीन) की पतंग अधिक बिकती है। ये पतंग कागज से बनी पतंग से सस्ती होती है। एक रुपये में पन्नी की पतंग आ जाती है, जबकि कागज की तीन रुपये की पड़ती है। बच्चे अपने जेबखर्च के अनुसार सस्ती ही लेते हैं। इस समय डोरेमोन, मिक्की माउस आदि कार्टून करैक्टर वाली पतंग की मांग है।
मेरठ का मांझा ज्यादा बिक रहा
पतंग कारोबारी दिलशाद ने कहा कि पर्व को लेकर पतंग की अच्छी मांग है। दो दिन में बिक्री काफी तेज हो गई है। आगरा और मथुरा की पतंग काफी बिकती है। इसके अलावा मेरठ के मांझा की भी ज्यादा मांग है।
त्योहार वाले दिन अधिक बिक्री
कारोबारी किरमान ने कहा कि त्योहार वाले दिन अधिक बिक्री की उम्मीद है। शहर के अलावा गांव देहात में पतंग का काफी क्रेज है। कई दिन पहले से वहां के दुकानदारों ने स्टॉक करना शुरू कर दिया था।
'लोहड़ी पर भी पतंग उड़ाऊंगा'
अर्जुन नगर निवासी वंश ने कहा कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का अपना अलग ही मजा है। जब भी मौका मिलता है, मैं यह शौक पूरा कर लेता हूं। मेरी संक्रांति ही नहीं बल्कि लोहड़ी पर पतंग उड़ाने की तैयारी है।
'संक्रांति पर शौक पूरा करूंगा'
काला महल निवासी योगेश ने कहा कि पूरे साल वक्त नहीं मिल पाता है। बचपन में तो लगभग रोजाना पतंग उड़ाते थे। इस बार फिर से संक्रांति पर शौक पूरा कर लेंगे। बाजार से अलग-अलग पतंग की खरीदारी कर ली है।
गालिब और नजीर भी थे पतंगबाजी के शौकीन
पतंगबाजी का शौक मिर्जा गालिब और नजीर अकबराबादी को भी था। दोनों शायरों का ताल्लुक आगरा से है। मिर्जा गालिब ने एक जगह जिक्र किया है, आगरा का एक कटरा जो कश्मीरन कहलाता था, इसके एक कोने से मैं पतंग उड़ाया करता था और राजा बलवान सिंह से पेंच लड़ाया करता था।
नजीर ने तो पतंगबाजी पर लिखा भी है-
मैं हूं पतंग - ए- कागजी, डोर है उसके साथ में
चाहा इधर घटा दिया, चाहा उधर बढ़ा दिया।