'जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे
भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते थे
जिन बेटों ने आजादी के लिए जवानी दे डाली
आजादी के हवन कुंड के लिए कहानी दे डाली
दूर गगन के तारे उनके नाम दिखाई देते हैं
उनके स्मारक भी चारों धाम दिखाई देते हैं।
वे देवों की लोकसभा के अंग बने बैठे होंगे।
वे सतरंगी इंद्रधनुष के रंग बने बैठे होंगे...।
युवा कवि डॉ. राहुल अवस्थी ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविता सुनाकर सभी को जोश से भर दिया। उन्होंने सुनाया... मां को है प्रणाम, है प्रणाम मां की माटी को, माटी पे लिखित तदबीरों को प्रणाम है, देश की स्वतंत्रता के शानदार पृष्ठों पर, एक खींची हुई काल की लकीरों को प्रणाम है।
कवि प्रवीण कुमार पांडेय प्रज्ञार्थ ने माटी वंदन गीत सुनाया...मैं तुझे हिंदुस्तान कहूं या कि अपनी पहचान कहूं। कवि राहुल शर्मा अक्षत ने कहा... संविधान की करें जो मर्यादा छिन्न भिन्न, उन्हें अपना ही संविधान कैसे सौंप दें, इंच-इंच बेच खाई देश की जिन्होंने, कहो उन्हें ये वसुंधरा महान कैसे सौंप दें। सत्ता हेतु चोर गठबंधन बना ही लेते, उन्हें इस देश की कमान कैसे सौंप दें। जिनकी रगों में खून है देशद्रोहियों का उन्हें ये समूचा हिंदुस्तान कैसे सौंप दें।
क्रांतिकारी शहीदे आजम भगत सिंह और दूसरे क्रांतिकारियों पर पंक्ति पढ़कर उन्होंने हर किसी को भाव विभोर कर दिया... बात सुनाऊं मैं तुमको आजादी के मतवालों की, देख हौसले जिनके छाती फट जाती थी कालों की।