जहां की रंग—बिरंगी चूड़ियां पूरे देश में खनकती हैं, शृंगार की इस नगरी फिरोजाबाद में अबकी बार रिश्तों की महाभारत का शंखनाद है। सैफई परिवार में भाई—भाई और चाचा—भतीजे में सियासी हिस्सेदारी और वर्चस्व का संघर्ष यहां चुनावी रण में नुमाया है। जिसमें एक ओर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री शिवपाल यादव हैं, तो उनके सामने सपा महासचिव राम गोपाल यादव के पुत्र सांसद अक्षय यादव गठबंधन प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। चाचा-भतीजे की इस जंग में सैफई कुनबे के संरक्षक मुलायम सिंह यादव खामोश हैं। भाजपा के डॉ. चंद्रसेन जादौन इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं। इनके अलावा प्रमुख रूप से चौधरी बशीर व राजवीर सिंह (निर्दलीय) और उपेंद्र सिंह राजपूत (भारतीय किसान परिवर्तन पार्टी) भी मैदान में हैं।
कई सपाइयों को शिवपाल ने अपने पाले में कियाः सैफई परिवार के रिश्तेदार भी चाचा-भतीजे के बीच बंट गए हैं। सपा के कई नेताओं को अपने पाले में करके शिवपाल ने जो चक्रव्यूह बनाया है, गठबंधन के जातीय समीकरण के दम पर अक्षय उसे काटकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। 2014 में अक्षय यादव जीते, तब सपा के जो प्रमुख नेता पार्टी के साथ थे, वे इस बार शिवपाल के साथ हैं। सिरसागंज से सपा विधायक हरिओम यादव शिवपाल के साथ हैं। जसराना से चार बार जीते सपा के पूर्व विधायक रामवीर यादव भाजपा के साथ हैं। सदर में पकड़ रखने वाले पूर्व विधायक अजीम भाई प्रसपा के साथ हैं। अक्षय के लिए मायावती, अखिलेश व अजित ने 20 अप्रैल को साझा रैली की। सपा नेता विद्रोह का असर खारिज करते हुए कहते हैं कि परंपरागत वोट पार्टी के साथ है। बसपा का साथ होने से बड़े लाभ को लेकर सपा उत्साहित है। सपा परंपरागत यादव वोट के साथ मुस्लिम और दलितों के वोट के साथ-साथ दीगर समाज के वोट अपने साथ मानकर चल रही है।
निशाने पर रामगोपाल
शिवपाल ने अपने अपमान का मुद्दा उठा रखा है। यादवों की पट्टी पर अपनी रिश्तेदारियों के साथ वह पार्टी बनाने का कारण बताकर रामगोपाल यादव को निशाने पर लिए हुए हैं। यादव पट्टी के साथ मुस्लिम क्षेत्र में शिवपाल कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
भाजपा को परिवार के झगड़े का लाभ मिलने की आस
भाजपा प्रत्याशी डॉ. चंद्रसेन जादौन 1996 में मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। लेकिन, संगठन में सक्रिय रहकर संघ से जुड़े रहे। शुरू में सैफई परिवार के दो दिग्गजों के सामने चंद्रसेन जादौन को कमजोर माना जा रहा था लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की जनसभा के बाद प्रचार भी रंग लाया। भाजपाई मान रहे हैं पूरे देश में मोदी लहर है और वोटर भाजपा को वोट देने के लिए आतुर है। ऐसे में चाचा-भतीजे जहां आपस में ही एक—दूसरे के वोट काट रहे हैं, इस स्थिति में भाजपा की स्थिति को कमजोर करके नहीं आंका जा सकता है। इस बार भाजपा सैफई परिवार के झगड़े का लाभ लेने को आतुर बैठी है।
आलू किसानों का दर्द कोई नहीं सुनता
फिरोजाबाद आलू का बड़ा उत्पादन क्षेत्र है। इससे पहले हुए चुनाव में पीएम मोदी से लेकर राहुल गांधी तक यहां आलू किसानों से वादा करके गए। इस चुनाव भी बड़े नेताओं ने सभाओं में आलू किसानों का जिक्र किया। अब तक सबसे बड़ा वादा जिले में आलू आधारित बड़ा सरकारी उपक्रम लगाने का हुआ है। आलू किसानों का दर्द है कि मोदी, योगी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव सभी नेता इसी तरह का वादा कर गए, पर अभी तक कोई वादा जमीन पर नहीं उतरा है। आलू की उपज के लागत वाले दाम भी नहीं मिल पाते हैं। जिले में 65 हजार से अधिक किसान आलू की फसल उगाते हैं। यहां करीब 166 कोल्डस्टोरेज हैं।