आगरा लोकसभा सीट के तहत पांचों विधानसभा क्षेत्रों में सबसे कम मतदान आगरा छावनी के निकले। यहां महज 48 फीसदी वोट पड़े, जबकि जलेसर में बंपर मतदान हुआ। जलेसर आगरा लोकसभा सीट का हिस्सा है, लेकिन एटा जिले में आता है। आगरा जिले में केवल फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र में ही 62 फीसदी मतदान कर सकी। शहर की छावनी विधानसभा क्षेत्र की तरह फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट के बाह में केवल 48 फीसदी मतदान हो सका।
मोदी लहर में सबसे ज्यादा 16 फीसदी उछाल
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आगरा में 58.9 फीसदी वोट डाले गए थे, जो उससे पिछले 2009 लोकसभा चुनाव से 16 फीसदी ज्यादा थे। 2009 में महज 42 फीसदी वोट डाले गए थे जो अब तक के चुनाव में सबसे कम है। मतदान में इतनी बढ़ोतरी कभी नहीं हुई। हालांकि 1977 के चुनाव में 13 फीसदी मतदान ज्यादा हुआ था। उसके बाद वर्ष 1998 में 10 फीसदी वोट बढ़े थे।
जनता लहर का नहीं टूट रहा रिकॉर्ड
लोकसभा चुनाव में मतदान का रिकॉर्ड जनता लहर में बना था, जो अब तक टूट नहीं पाया है। वर्ष 1977 में आगरा की जनता ने 65.7 फीसदी मतदान किया था। 1977 से अब तक एक बार भी आगरा के मतदाता 60 फीसदी मतदान को भी पार नहीं कर सके हैं। जनता लहर के बाद सबसे ज्यादा मतदान बीते लोकसभा चुनाव 2019 में 59.6 फीसदी हुआ था, जो इस बार पांच फीसदी लुढ़क गया।
मई में बढ़ा तापमान तो गिरा मतदान
लोकसभा चुनाव जब भी मई में हुए, तब ज्यादातर मतदान में कमी दर्ज की गई। साल 2009 में 13 मई को आगरा में वोट डाले गए, तब सबसे कम 42 फीसदी वोट पड़े। इसी तरह 5 मई 2004 को मतदान हुआ तो 44 फीसदी वोट पड़े। 7 मई 1996 को मई में तापमान बढ़ा तो मतदान 43 फीसदी रह गया। इसी तरह 20 मई 1991 को जब मतदान हुआ तो आगरा में केवल 45 फीसदी मतदाता ही वोट डालने निकले।