16-जिला अस्पताल में रैन बसेरा में लटकता ताला
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मैनपुरी। दिसंबर का पहला सप्ताह बीत चुका है, रातें सर्द होने लगी हैं। घरों में लोग कंबल, रजाई का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में तीमारदारों को खुले में ठिठुरना पड़ रहा है। तीमारदारों के लिए बने स्थाई रैन बसेरा में यहां ताला लगा रहता है। वहीं तीमारदारों को खुले में बैठकर रात गुजरनी पड़ रही है। तीमारदारों की इस समस्या पर न तो जिला और अस्पताल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है।
जिला अस्पताल परिसर में ही जिला महिला अस्पताल और सौ शैय्या अस्पताल स्थित है। जिले भर से मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। परेशानी मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को उठनी पड़ती है। वर्तमान में जिला अस्पताल में बने स्थाई रैन बसेरा में तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्था नहीं की गई है। यहां हर समय ताला लटका रहता है। वहीं वार्डों में एक से ज्यादा तीमारदारों को रुकने नहीं दिया जाता है। ऐसे में तीमारदारों को अस्पताल परिसर में जागकर रातें काटनी पड़ती हैं। जो तीमारदार घर से रजाई-कंबल लेकर आते हैं उन्हें भी जमीन पर बेंच ही नसीब होती है।
शहर के मोहल्ला न्यू गाड़ीवान निवासी पप्पू के बेटे अवधेश की तबियत खराब है। उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया है। सोमवार रात को बेटे की देखरेख के लिए पप्पू अपनी पत्नी गीता के साथ जिला अस्पताल आए हुए थे। इमरजेंसी में अवधेश की देखरेख के लिए उनकी पत्नी मौजूद थीं। ऐसे में नर्सिंग स्टॉफ ने मां-बाप को बाहर कर दिया। दंपती रात में इमरजेंसी के बाहर बैठे रहे। सर्दी और सर्द हवाओं की वजह से दंपती को काफी परेशानी उठानी पड़ीं।
ज्योंती रोड निवासी सुनीता देवी के बेटे सुरेंद्र की तबियत खराब होने पर उन्हें जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है। सुनीता देवी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बेटे की देखभाल के लिए अस्पताल में मौजूद थीं। वार्ड में उन्हें रुकने नहीं दिया गया तो वह परिवार की गीता देवी के साथ रात में इमरजेंसी के बाहर खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे बैठ गईं। यहां सर्दी के साथ-साथ दोनों महिलाओं को सुरक्षा का डर भी सता रहा था।
अस्पताल परिसर में तीमारदारों के लिए कई स्थानों पर टिनशेड पड़े हैं। वहीं तीमारदारों के लिए रैन बसेरा संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। अलाव के लिए नगर पालिका को पत्र लिखा जाएगा।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस