मैनपुरी। लॉकडाउन के बाद जिले में लौटे हजारों मजदूरों को रोजगार दिलाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। शासन और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी अब तक आधे मजदूरों को भी काम नहीं मिल सका है। इससे उनकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं।
देश में कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च में लॉकडाउन की घोषणा की थी। इसके बाद से ही गैर जिले और प्रदेशों में काम करने वाले मजदूर अपने घर लौटना शुरू हो गए थे। 25 मार्च से लेकर अब तक जिले में 17 हजार के करीब प्रवासी मजदूर लौटे हैं। इन्हें गांवों में ही रोजगार दिलाने के लिए प्रशासन और शासन लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद भी मजदूरों की समस्याएं कम होती नजर नहीं आ रही हैं। दरअसल जिले में अब तक छह हजार प्रवासी मजदूरों को ही मनरेगा योजना के तहत काम मिल सका है। इसके चलते बाकी के 11 हजार मजदूर घर पर ही बैठे हुए हैं। अगर जल्द ही इन्हें रोजगार न मिला तो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
सभी विभागों से मांगी गई है योजना
प्रशासन ने सभी मजदूरों को काम दिलाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए सभी विभागों से अलग-अलग योजना मांगी गई है। सभी विभागों को आगामी छह माह में उनके विभाग से मजदूरों को मिलने वाले काम की योजना बनाकर मुख्य विकास अधिकारी को सौंपनी होगी। इससे प्रत्येक विभाग मजदूरों को काम देने में सहायता कर सकेगा।
मनरेगा से मजदूरों को काम दिलाया जा रहा है। अधिक से अधिक मजदूरों को काम मिले इसके लिए सभी विभागों से योजना मांगी गई है। जल्द ही प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिलाने का आंकड़ा बढ़ने लगेगा। - नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।