कासगंज रेल लाइन के किनारे बदायूं की ओर जाते रेवाड़ी के श्रमिक
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कासगंज। लॉकडाउन के बीच तमाम आशंकाओं से घिरे लोग जहां तहां फंसे हुए हैं। वे अपने गांव, कस्बे में पहुंचने के लिए हर तरीका अपना रहे हैं। कोई साइकिल और बाइक का सहारा ले रहा है तो कोई रेल लाइन के सहारे ही अपने घर परिवार के बीच पहुंचने की कवायद में जुटे हैं। लगातार यह सिलसिला जारी है। गांव गांव पहुंचने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
शुक्रवार को रेल लाइन के सहारे अपने घर जाने के लिए हरियाणा के रेवाड़ी से मजदूरों का एक जत्था बदायूं के दातागंज की ओर जा रहा था। ये लोग चार दिन पूर्व रेवाड़ी से रेललाइन के सहारे चले थे। कासगंज से रेवाड़ी की दूरी करीब 250 किलोमीटर है। जबकि दातागंज तक की दूरी करीब 340 किलोमीटर है। शुक्रवार शाम तक ये लोग अपने गांव तक पहुंच पाऐंगे।
लगातार चलने के कारण मजदूर बेहद परेशान थे। उनका कहना था कि वे दिहाड़ी मजदूरी करते थे। उनके पास न काम है और न ही खाने का इंतजाम है। ऐसी स्थिति में घर के सिवा कहां रह सकते थे। घर में रहेंगे तो जैसे तैसे गुजारा कर लेंगे।
श्रमिक मुकेश, हमीरचंद, सोनू, सुरजीत, साहुन, टीटू, रामसिंह, मुकेश ने बताया कि रेवाड़ी में उन्हें बहुत परेशानी हो रही थी, इसलिए रेलमार्ग के सहारे घर जाने का फैसला कर लिया। बस बिस्किट खाकर और पानी पीकर अपना गुजारा कर रहे हैं।
लगातार इसी तरह लोगों के आने का सिलसिला जारी है। तीन दिन पूर्व सहावर में राजस्थान से आने वाले श्रमिकों को रोककर एक इंटर कॉलेज में क्वारंटीन किया गया। लोग कच्चे रास्तों के सहारे कोई साइकिल से तो कोई बाइक से पुलिस से नजर बचाकर अपने घर तक पहुंचने की कोशिशों में जुटे हैं।