होटल में फंसे अगरतला के लोगों से बात करते आगरा के सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल
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देश में तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ने की घोषणा से आगरा कैंट स्थित होटल सरवन में किसी तरह दिन काट रहे 55 लोगों के ग्रुप के सब्र का बांध टूट गया। ज्यादातर लोगों के पास पैसे खत्म हो चुके हैं। उन्होंने अगरतला की सांसद से गुहार लगाई। इसके बाद स्थानीय सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल लोगों को सांत्वना देने होटल पहुंचे। सांसद ने कहा कि आप हमारे मेहमान हैं और आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
अगरतला (त्रिपुरा) के शंकर घोष ने बताया कि वह 48 लोगों के ग्रुप के साथ 22 मार्च को आगरा घूमने आए थे। तपन कुमार, दिलीप दास समेत 15 परिवारों के 48 लोगों ने होटल सरवन में कमरे बुक कराए। इसी तरह कोलकाता के चंदन शाह, अभिजीत राय, देव शर्मा ग्रुप के आठ सदस्य हैं।
यह सभी लोग तब से यहां फंसे हुए हैं। होटल मालिक कमल कुमार अग्रवाल ने बताया कि इन लोगों से नोमिनल किराया ही लिया जा रहा है। खाने पीने की व्यवस्था लगातार कराई जा रही है। पूड़ी सब्जी नहीं खाते हैं। चावल ज्यादा खाते हैं, इसलिए भी दिक्कतें आ रही हैं।
भावना शाह ने बताया कि उनका 17 अप्रैल को लौटने का रिजर्वेशन था, लेकिन लाकडाउन बढ़ाने की खबर से उनका हौसला जवाब दे गया। महिलाएं फूट फूट कर रोने लगीं। अब कैसे काटेंगे इतने दिन। घरवाले भी परेशान हैं। होटल वाला कब तक खिलाएगा।
अगरतला के सांसद प्रतिमा भौमिक ने आगरा के सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को जानकारी दी। इसके बाद प्रोफेसर बघेल ने होटल पहुंचकर यहां ठहरे लोगों से बातचीत की। उन्हें दिलासा दी कि आगरा प्रशासन उनका ख्याल रखेगा। सांसद ने कहा कि किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। नार्थ ईस्ट से ब्रज का गहरा नाता है, रुक्मिणी भी वहां की थीं। इसके बाद ही महिलाएं शांत हुईं। उन्होंने होटल मालिक व अन्य समाजसेवियों से मदद करने को कहा।
सब्र जवाब दे गया साहब
हमें अपने घर जाना है साहब, अब धैर्य नहीं होता है। यहां खाने के अलावा नहाने धोने से लेकर बहुत चीजों की जरूरत होती है। कितने दिन तक बाहर रहा जा सकता है। - रीता घोष, त्रिपुरा
घर की याद आ रही है
कितने दिन तक लोगों पर बोझ बनकर रहें। हमारा घर भी वहां ऐसा ही पड़ा है, हमें उम्मीद थी कि अब घर लौट सकेंगे, मगर सरकार ने लॉकडाउन बढ़ाकर हमारी मुसीबतें बढ़ा दीं। -भावना शाह, त्रिपुरा
कौन खिला देगा, यहां किससे मांगें
साहब दो चार दिन तो सब चला लेते हैं, लेकिन लाक डाउन बढ़ाने से पहले फंसे हुए लोगों को तो उनके घर तक पहुंचाना चाहिए। कौन खिला देगा, यहां किससे मांगें। - रेखा चक्रवती, अगरतला