बातचीत हुई, सुधरा रिश्ता
शाहगंज निवासी मंजू शर्मा ने बताया कि परिवार परामर्श केंद्र पर हम दोनों का मामला चल रहा था। लॉकडाउन में पति अभिषेक ने घर में काफी समय बिताया। भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक ठहराव मिला। दोनों के बीच काफी बाचतीत हुई। गलतफहमियों से उलझे मामले घर में ही सुलझ गए। हम दोनों ने मिलकर फैसला लिया कि सफर साथ-साथ तय करेंगे।
दो महीने में आधे हो गए मामले: डॉ. गुरनानी
मनोरोग चिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी का कहना है कि पिछले दो महीनों से पति और पत्नी के बीच आने वाले शक के मामलों में कमी आई है। पहले महीनेभर में इस तरह के 15 मामले तक आ जाते थे, वहीं अब पूरे महीने में इनकी संख्या सात से भी कम रहती है। ऐसे मामलों में गिरावट का मुख्य कारण लॉकडाउन के दौरान पति और पत्नी के बीच बढ़ा संवाद और अपनों को खोने के दर्द को महसूस करना है।