लॉकडाउन के बाद फास्टैग की अनिवार्यता भुला दी गई है। अनलॉक के बाद दिल्ली, ग्वालियर और अलीगढ़ रूट पर वाहन चल रहे हैं लेकिन फास्टैग आधे वाहनों में भी नहीं लगा है। अगर आगरा-दिल्ली की बात करें तो सामान्य दिनों में महुअन टोल प्लाजा से करीब 30 हजार वाहन प्रतिदिन गुजरते थे।
अनलॉक-1 में करीब 25 हजार वाहन चल रहे हैं, इनमें से लगभग 12 हजार पर फास्टैग नहीं होता है। वहीं आगरा-अलीगढ़ और आगरा-ग्वालियर रोड पर सामान्य दिनों में 20 हजार वाहन प्रतिदिन टोल प्लाजाओं से गुजर रहे थे। अनलॉक के बाद करीब 15 हजार वाहन चल रहे हैं, मगर इनमें से करीब 10 हजार वाहन फास्टैग से लैस नहीं हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने जनवरी में फास्टैग की अनिवार्यता को लागू किया था, लेकिन लॉकडाउन के बाद एक माह तक टोल प्लाजा नि:शुल्क रहे। इसके बाद वाहनों की आवाजाही इतनी कम रही कि कैश लेनदेन को उचित समझा गया। अब अनलॉक के बाद वाहनों में निरंतर इजाफा हो रहा है।
आगरा से अलीगढ़ हाईवे के बरोस टोल, आगरा फिरोजाबाद के टूंडला टोल, आगरा ग्वालियर रायभा टोल प्लाजा पर वाहनों का आवागमन एक सप्ताह में 70 फीसदी से ज्यादा पहुंच गया है, लेकिन इन टोलों पर टोल का भुगतान नगदी के रूप में ज्यादा किया जा रहा है।
कैशलेस भुगतान कुछ व्यवसायिक वाहन चालक ही कर पा रहे हैं। वहीं आगरा दिल्ली हाईवे पर दिल्ली से माल लेकर सड़क यातायात से आने वालों वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां एक सप्ताह के भीतर 80 फीसदी तक वाहनों का आवागमन चल रहा है। यहां फास्टैग भी लगभग 50 फीसदी से अधिक है।
वाहनों की संख्या पर जोर : परियोजना निदेशक
टोल प्लाजा पर लॉकडाउन में ढील के बाद वाहनों की आवाजाही को ज्यादा देखा जा रहा है। वह किस तरीके से भुगतान कर रहे हैं, इस पर ध्यान नहीं है। फास्टैग वाले वाहनों की संख्या तकरीबन 30 फीसदी ही है। हालांकि ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। -अरुण कुमार यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई