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भाषाई दूरियां मिटी, अब मनचाही भाषा में शुद्ध अनुवाद

Mon, 27 Jun 2016 02:11 AM IST
अमर उजाला आगरा
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linguistic distances finish, now pure translation in multiple languages - फोटो : Amar Ujala
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केएचएस के शिक्षक का कमाल, बनाया साफ्टवेयर
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12 भाषाओं का चंद सेकेंड में हो जाएगा अनुवाद

रविंद्रनाथ टैगोर, सुब्रह्मण्यम भारती, बंकिमचंद्र चटर्जी जैसे साहित्यकारों को पढ़ना चाहते हैं तो अब भाषाएं रोड़ा नहीं बनेंगी, न ही इनके साहित्य की अपनी भाषा में अनुवाद की हुई पुस्तकें ढूंढने की जरूरत पड़ेगी। केंद्रीय हिंदी संस्थान (केएचएस) के कंप्यूटर प्रोग्रामर हिमांशु अग्रवाल ने ऐसा क्रांतिकारी साफ्टवेयर विकसित किया है, जिससे भाषाई दूरियां मिट जाएंगी। चंद सेकेंड में कंप्यूटर की स्क्रीन पर किसी भी साहित्य, लेख का अपनी मनचाही भाषा में अनुवाद नजर आएगा। उन्होंने इस साफ्टवेयर को ‘लिपि अंतरण’ नाम दिया है। इससे 12 भाषाओं का एक-दूसरे में अनुवाद संभव है। यह साफ्टवेयर आफलाइन काम करेगा। हिमांशु बताते हैं कि अनुवाद के वक्त भाषाई त्रुटियां भी नहीं मिलेंगी। इसके भावार्थ में भी अंतर नहीं होगा। इस साफ्टवेयर से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सुविधा मिलेगी, किसी भी भाषा को समझना आसान हो जाएगा। 

ऐसे करेगा कार्य 
किसी भी भारतीय भाषा का टेक्स्ट में इनपुट करना होगा। जो भी आप भाषा चाहते हैं, उसके आगे क्लिक कर दीजिए। आपकी मनचाही भाषा में अनुवाद सामने होगा। हिमांशु बताते हैं कि इसे पेटेंट कराने की तैयारी है। इसके बाद बाजार में इस साफ्टवेयर की सीडी मिलनी शुरू हो जाएंगी। इसके जरिये कंप्यूटर पर साफ्टवेयर अपलोड किया जा सकेगा। 
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... इसलिए बना डाला साफ्टवेयर 
आवास विकास कालोनी में रहने वाले हिमांशु बताते हैं कि उन्हें नामचीन लेखक और उनकी पुस्तकें पढ़ने का शौक है। भाषा बार-बार संकट बनती थी। ऐसे में उन्होंने ठान लिया कि इसका समाधान निकाला जाए। आठ महीने के अथक प्रयास के बाद सफलता मिली। 

इन भाषाओं का करेगा अनुवाद
हिंदी
असमिया
बांग्ला
गुजराती
पंजाबी
कन्नड़
मलयालम
उड़िया
तमिल
तेलुगू
मराठी
उर्दू  
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