एक मिनट में पांच लीटर का हाई फ्लो
आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि हाई फ्लो उपकरणों में प्रति मिनट पांच लीटर ऑक्सीजन खर्च होती है। वेंटिलेटर और अन्य हाई फ्लो उपकरणों के लिए अधिक ऑक्सीजन चाहिए। पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही। फिर वेंटिलेटर व अन्य उपकरण कैसे चलाएं। आगरा में 34 कोविड अस्पताल हैं, यहां 350 से अधिक जीवन रक्षक उपकरण ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं चल पा रहे हैं। सिलेंडर ही गंभीर मरीजों के लिए विकल्प है।
रिपोर्ट नेगेटिव, लक्षणों में गंभीर संक्रमण
आईएमए के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. ओपी यादव ने बताया कि निजी कोविड अस्पतालों में प्रशासन ने सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं। ऐसे मरीज अधिक भर्ती हो रहे हैं जिनकी कोविड रिपोर्ट नेगेटिव है, लेकिन सीटी स्कैन जांच में फेफड़े खराब हो चुके हैं। संक्रमण के गंभीर लक्षण हैं। कोविड मरीज दो हजार हैं तो गंभीर हालात के नेगेटिव कोविड मरीज भी 1200 से अधिक उपचाराधीन हैं।
राहत: एसएन में चल रहे 20 से अधिक वेंटिलेटर
एक तरफ निजी कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से वेंटिलेटर आदि बंद पड़े हैं तो वहीं दूसरी तरफ एसएन मेडिकल कॉलेज में 20 से अधिक वेंटिलेटर चल रहे हैं। यहां एचएनएफसी, बाईपेप व अन्य उपकरणों से गंभीर मरीजों को हाई फ्लो ऑक्सीजन दी जा रही है। पिछले साल एसएन में दस हजार लीटर ऑक्सीजन का प्लांट लगा था, जिसके माध्यम से पाइपलाइन द्वारा सीधे आईसीयू में हाई फ्लो ऑक्सीजन आपूर्ति होती है। एसएन में 300 से अधिक कोविड मरीज भर्ती हैं।