मैनपुरी। वकीलों के साथ काम करने वाले लिपिक (मुंशी) बिना पंजीकरण कराए अदालतों में काम नहीं कर सकेंगे। लिपिकों का दीवानी न्यायालय में पंजीकरण कराना जरूरी किया गया है। प्रभारी अधिकारी नजारत ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को पत्र भेजकर वकीलों के साथ काम करने वाले सभी लिपिकों का अतिशीघ्र पंजीकरण कराने को कहा है।
दीवानी में लगभग 800 वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं। अधिकांश वकीलों के साथ उनके लिपिक (मुंशी) भी काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने वकीलों के साथ काम करने वाले लिपिकों का पंजीकृत होना अनिवार्य किया है। अब अदालतों में केवल पंजीकृत लिपिक ही वकील के सहयोगी के रूप में काम कर सकेंगे। दीवानी में अभी तक केवल 87 लिपिकों ने अपना पंजीकरण कराया है। अधिकांश लिपिक बिना पंजीकरण कराए ही अदालतों में काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के तहत दीवानी न्यायालय के प्रभारी अधिकारी नजारत ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष तथा सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में कहा है कि दीवानी न्यायालय में प्रैक्टिस कर रहे सभी वकीलों के लिपिकों का पंजीकरण कराया जाए। पंजीकरण कराने वाले लिपिकों की सूची नजारत में जमा करा दी जाए।
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सभी वकीलों के लिपिकों का पंजीकृत होना जरूरी है। प्रभारी अधिकारी नजारत के पत्र के बाद वकीलों से अपने लिपिकों का पंजीकरण अतिशीघ्र कराने को कहा गया है। पंजीकरण नहीं कराने वाले लिपिक अब अदालतों में काम नहीं कर सकेंगे।
सौरभ यादव, अध्यक्ष बार एसोसिएशन