कासगंज। तहसील क्षेत्र के गांव गंगागढ़ की लगभग 11 एकड़ विवादित जमीन पर एसडीएम न्यायालय ने फैसला सुनाया है। जमीन को राज्य सरकार के पक्ष में निहित किया गया है। क्रेता विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश देते हुए उन्हें बेदखल कर दिया गया है।
जिलेभर में तमाम सरकारी संपत्तियाें पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा है। विगत दिनों सोरों क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्रफल की सरकारी संपत्ति को प्रशासन ने कब्जा मुक्त कराया। सरकारी संपत्ति पर घोटाले का एक और बड़ा मामला सामने आया है। गंगागढ़ गांव में लगभग 11 एकड़ सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं ने फर्जी तरीके से कब्जा किया और उनके बैनामे भी कर दिए। मामले में एसडीएम न्यायालय में वाद दायर किया गया और सुनवाई की गई। राज्य सरकार की ओर से प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश चंद्र पाल, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार यादव ने अपना पक्ष रखा। पक्ष विपक्ष के तर्क सुनने के बाद एसडीएम ने पाया कि गंगागढ़ में विवादित जमीन सरकारी संपत्ति है और सभी विक्रेताओं ने सभी क्रेताओं को फर्जी तरीके से बैनामे कर दिए। एसडीएम ने सभी बैनामे फर्जी मानते हुए क्रेता विक्रेताओं को जमीन से बेदखल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही तहसीलदार को निर्देश दिए कि वह क्रेता और विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं। सरकारी संपत्ति सरकार के पक्ष में निहित कर दी है।
तथ्य छिपाकर किए बैनामे
कासगंज। सरकार के पक्ष में निहित की गई जमीन पूर्व में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए पट्टे पर आवंटित थी। हालांकि भूमाफियाओं ने अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन का जालसाजी से बैनामा करा लिया। सामान्य वर्ग के होने के बावजूद भी स्वयं को अनुसूचित जाति का बताया। एसडीएम ने जिलाधिकारी की अनुमति के बिना किए सभी बैनामे खारिज कर दिए।
आंकड़े की नजर से-
- 8 लोगों ने खरीदी पट्टे की जमीन।
- 14 विक्रेताओं ने पट्टे की जमीन का किया धोखाधड़ी से बैनामा।
- पट्टे की जमीन पर धोखाधड़ी कर बैनामे कराने के मामले में दोनों पक्षों को सुना। विवादित संपत्ति राज्य सरकार के अधीन निहित की गई है। क्रेता विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश तहसीलदार को दिए हैं।
- ललित कुमार, एसडीएम।