कासगंज भरगैन के शहीद जाबांज आरिफ खान
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कासगंज। भाई तेरी शादी नजदीक आ रही है। मैं शादी से एक दिन पहले पहुंच जाऊंगा और तेरी शादी में जमकर धमाल मचाएंगे। लंबी छुट्टी लेकर आऊंगा। कई दिन वहीं बिताऊंगा। बस छुट्टी मंजूर होते ही जम्मू कश्मीर से निकल आऊंगा। यह बात शहीद आरिफ ने रविवार देर रात अपने चचेरे भाई सरफराज से की थी।
विगत वर्ष आरिफ मोहर्रम के दिन भरगैन आया था। वह कस्बे के लोगों के साथ एक दिन रहा और इसके बाद जल्द लौटकर आने की बात कहकर चला गया। आरिफ के चाचा और अन्य परिजन भरगैन में रहते हैं। आगामी 24 जुलाई को चाचा शाबाद खान के बेटे सरफराज की शादी है। आरिफ ने रविवार को सरफराज को फोन किया था और सरफराज को भरोसा दिलाया था कि वह शादी से एक दिन पहले भरगैन पहुंच जाएगा। लंबी छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दे दिया है। बस मंजूरी मिलने ही वाली है। आरिफ ने सरफराज से कहा था कि शादी में भी जमकर धमाल मचाएंगे, लेकिन सोमवार को सैनिक की मौत की खबर मिलते ही चाचा के परिवार के होश उड़ गए। सरफराज का कहना है कि रविवार को आरिफ बात करते समय काफी खुश था। उसे कस्बे में आने की उत्सुकता थी।
काश मंजूर हो जाती छुट्टी
भरगैन। आरिफ के चाचा शाबाद खान का कहना है कि उनके भतीजे ने सरफराज की शादी में आने की तैयारी की थी। बस छुट्टी नहीं मिली थी। यदि रविवार तक छुट्टी मिल जाती तो आरिफ शहीद न होता। शादी की खुशियां अब मातम में बदल गईं हैं। आरिफ की मौत से पूरी तरह टूट गए हैं।
भाई भी कर रहा सेना की तैयारी
कासगंज। आरिफ के तीन भाई और दो बहनें हैं। उसका छोटा भाई आसिफ खान भी सेना भर्ती की तैयारी कर रहा है। बड़े भाई की मौत के बाद अब उसने अपना दृढ़ संकल्प और भी मजबूत कर लिया है। आसिफ ने संकल्प लिया है कि वह सेना में भर्ती होकर आतंकियों को सबक सिखाएगा और अपने भाई की मौत का बदला लेगा।
पढने में काफी होशियार था आरिफ
कासगंज। आरिफ पढ़ने में होशियार होने के साथ साथ होनहार भी था। कक्षा 12 की परीक्षा पास करने के बाद उसने कड़ी मेहनत कर सेना में भर्ती पाने में सफलता हासिल की थी। वह सेना में भर्ती होने के बाद भी स्नातक में प्रवेश ले चुका था।