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फर्जी विक्रेता बनकर जमीन का बैनामा: 3 साल में भी सबूत नहीं जुटा सकी पुलिस, तीसरी बार लगी फाइनल रिपोर्ट

Tue, 24 Feb 2026 09:49 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

तहसील सदर में फर्जी विक्रेता खड़ा कर जमीन बेचने के आरोप में दर्ज मुकदमे में तीन साल बाद भी पुलिस ठोस साक्ष्य नहीं जुटा सकी और तीसरी बार फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पीड़ित न्याय के लिए भटक रहे हैं।
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा तहसील सदर में जमीन के फर्जीवाड़े का एक मामला फाइलों में दबकर रह गया। बराैली अहीर निवासी मजदूर चेतराम का आरोप है कि उसकी जमीन को फर्जी दस्तावेज और विक्रेता खड़ा कर बेच दिया गया। कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हुई। मगर पुलिस ने साक्ष्य संकलन नहीं किया। मामले में पुलिस तीन बार फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी है। पीड़ित न्याय के लिए भटक रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि एक बार फिर जांच कराई जाएगी।
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गांव बराैली अहीर, थाना ताजगंज निवासी चेतराम मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि पिता डालचंद ने 400 वर्गगज का प्लाॅट मुस्तफा क्वार्टर क्षेत्र में खरीदा था। विक्रेता ईदगाह काॅलोनी निवासी शैली सक्सैना थीं। वह चार भाई थे। इनमें भगवान सिंह, जोगेंद्र, रमेश और वो खुद हैं। भाइयों में प्लाॅट का बंटवारा सामाजिक स्तर पर कर दिया गया। बाकी तीनों भाइयों ने मकान बनवा लिए। इनमें रहने भी लगे। उनका प्लाॅट ही रहा। वह गांव में रह रहे थे। रमेशचंद्र की मृत्यु हो चुकी है। उनका बेटा हरवेंद्र मकान में रहता है।

 

चेतराम का आरोप है कि 8 अक्तूबर 2021 को तहसील में फर्जी तरीके से पिता की जगह अज्ञात व्यक्ति को खड़ा कर उसके हिस्से की 86.33 वर्गगज जमीन का बैनामा नरायच निवासी कुसुमा के नाम पर कर दिया गया। बैनामे के पृष्ठ संख्या 4 के पीछे कंप्यूटर से लिया गया फोटो भी उनका और पिता का नहीं है। इसके बावजूद बैनामा कराया गया। जिस समय बैनामा हुआ, उस समय उसके पिता बीमार थे। चलने-फिरने में भी असमर्थ थे। 10 दिसंबर 2021 को उनकी मृत्यु भी हो गई।
 

तहसील से जानकारी करने पर पता चला कि पिता की जगह किसी और व्यक्ति को खड़ा किया गया। उस व्यक्ति का फोटो बैनामे के चतुर्थ पृष्ठ पर माैजूद है। बैनामे के बाद प्रथम पृष्ठ पर उसके और पिता का फोटो तहसील सदर कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से बदलकर लगा दिया गया। इसके लिए चेक से 6.50 लाख रुपये की धनराशि देना दर्शाया गया। मगर यह चेक किसने जारी किया और किसके खाते में गया? इसका जिक्र नहीं किया गया। खाता संख्या नहीं लिखी। चेक भी फर्जी होने का अंदेशा है।

 

इस संबंध में पुलिस से शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इस पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तब कहीं 14 सितंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई। मगर आज तक पीड़ित को न्याय का इंतजार है।
 

यह हैं तथ्य
- भगवान सिंह, जोगेंद्र सिंह, हरवेंद्र, कुसुमा बघेल, रामप्रकाश, किशन सिंह ओर अन्य तहसील के कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
- विवेचना में एक वसीयत सामने आई थी जो वर्ष 2018 में हुई थी। वसीयत डालचंद्र ने की थी। इसके मुताबिक, चेतराम को बराैली वाला मकान दिया गया। सोहल्ला, सदर की संपत्ति को पुत्र जोगेंद्र, भगवान और मृतक हरवेंद्र के नाम पर किया था।
- आरोप साबित नहीं होने पर फाइनल रिपोर्ट लगाई गई थी। इससे वादी संतुष्ट नहीं था। इस पर फिर से जांच हुई। मगर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी संबंधी साक्ष्य नहीं मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
- सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने भी जांच के आदेश किए। इस पर पुन: विवेचना की गई। दिसंबर 2025 में साक्ष्य नहीं मिलने पर तीसरी बार फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।


 
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फिर कराएंगे विवेचना
एसीपी लोहामंडी गाैरव सिंह ने बताया कि जमीन को फर्जी तरीके से बेचने का आरोप लगाया गया था। विवेचना में साक्ष्य नहीं मिलने पर फाइनल रिपोर्ट लगाई थी। अगर पीड़ित फिर से संतुष्ट नहीं होंगे तो पुन: विवेचना कराई जाएगी। 
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