मैनपुरी। सरकार द्वारा कुरावली तहसील क्षेत्र में डॉ. आंबेडकर विकास अनुसंधान को दिया गया भूमि का पट्टा निरस्त कर दिया। इसके लिए जिले में बीते तीन से चार दशकों में किए गए बड़े पट्टों की जांच की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने ऐसे पट्टों को चिह्नित करने के लिए राजस्व कर्मचारियों को आदेश दिया है।
जिले में हजारों बीघा भूमि के लोगों और संस्थाओं को पट्टे दिए गए हैं लेकिन कुरावली तहसील में डॉ. आंबेडकर विकास अनुसंधान द्वारा 480 बीघा सरकारी जमीन को निजी फायदे के लिए उपयोग करने का मामला सामने आने के बाद शासन ने इस पट्टे को निरस्त कर दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन ने ऐसी सभी फाइलों को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं, जिनमें बड़ी भूमि के पट्टे बीते तीन से चार दशक में किए गए हैं। साथ ही इनका भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि जांच में डॉ. आंबेडकर विकास अनुसंधान जैसे अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं। हालांकि प्रशासन इस कार्रवाई को गोपनीय बनाए हुए है।
आसान नहीं होगा भूमि खाली कराना
शासन ने शिकायत के बाद डॉ. आंबेडकर विकास अनुसंधान को दिया गया 480 बीघा का पट्टा तो निरस्त कर दिया है, लेकिन इसे खाली कराना आसान नहीं होगा। इस भूमि पर बबूल उगाकर उनको बेचने का काम किया जा रहा है। पूर्व में भी जिले में पट्टे निरस्त करने के बाद जमीन पर खेती करने के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें प्रशासन अब तक कुछ नहीं कर पाया है।
अहिरवा में है बड़ा फर्जीवाड़ा
तहसील भोगांव की ग्राम पंचायत अहिरवा में भूमि का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। यहां ग्राम सभा की करीब दो हजार बीघा भूमि का फर्जीवाड़ा किया गया है। शिकायत के बाद अब तक जांच में एक हजार बीघा से अधिक का मामला खुल चुका है। इनके पट्टे भी निरस्त किए जा चुके हैं। प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी भू माफिया कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं।
हथपऊ की नहीं हुई जांच
गांव हथपऊ के ग्रामीण भी रसूखदारों को कीमती भूमि के पट्टे दिए जाने की शिकायत अफसरों से कर चुके हैं। हालांकि अभी तक इन शिकायतों पर ठोस जांच नहीं हुई है।
गलत तरीके से किए गए पट्टों की जांच कर उन्हें निरस्त कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। जहां तक कब्जा खाली कराने की बात है तो प्रशासन सख्ती करने से भी नहीं चूकेगा।
बी राम, अपर जिलाधिकारी।