कान्हा जी की पोशाक देखती युवती
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आगरा में रक्षाबंधन व स्वतंत्रता के बाद अब बाजार जन्माष्टमी के लिए सज गए हैं। इस बार जन्माष्टमी पर कान्हा कोलकाता और सूरत से बनी पोशाक पहनेंगे। कोलकाता की पोशाक पर जहां सारा काम हैंडीक्राफ्ट का है, वहीं सूरत की पोशाक मशीन से तैयार किया गया है। अलग-अलग रंग और डिजाइन की पोशाक भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा जरी मुकुट और पगड़ी की इस बार अच्छी मांग हैं।
शहर के बाजारों में पोशाक, बांसुरी, मुकुट, हिंडोला आदि पूजा सामग्री की दुकानें सज गई हैं। रावतपाड़ा स्थित पोशाक व अन्य पूजा सामग्री के थोक विक्रेता अतुल कटारा ने बताया कि इस बार कोलकाता की हैंडीक्राफ्ट से बनी पोशाक के साथ सूरत की बनी पोशाकों की अधिक मांग है। उन्होंने बताया कि ये पोशाक आगरा में पहली बार आई हैं, जो लोगों को खूब भा रही हैं। कोलकाता वाली पोशाकों पर बारीक और हाथ की खूबसूरत कारीगरी दिखती है। इसके अलावा इस पोशाक की चोली अलग है और पोशाक का आधा भाग अलग है। वहीं सूरत की पोशाक मशीन से बनी हुई हैं। इसलिए इसमें कई प्रकार के डिजाइन और सफाई ज्यादा होने के कारण यह बहुत खूबसूरत दिख रही हैं। इसके अलावा मोर पंख पोशाक, राजस्थानी पोशाक आदि भी बाजार में उपलब्ध हैं।
ये हैं कीमतें
रावतपाड़ा के महेश बंसल ने बताया कि कोलकाता की पोशाक की कीमत 250 से तीन हजार रुपये, सूरत की पोशाक 250 से ढाई हजार रुपये तक, राजस्थानी पोशाक, 200 से एक हजार रुपये तक, मोर पंख 50 से 1500 रुपये तक है। इसके अलावा मुकुट में जरी वाले मुकुट 150 से एक हजार रुपये व पगड़ी वाले मुकुट 100 से 500 रुपये तक में उपलब्ध हैं।
काशी के हिंडोले की मांग
जन्माष्टमी पर कान्हा काशी में बने हाथों से तैयार किए हुए हिंडोले में झूलेंगे। बाजारों में इनकी खासी मांग हैं। इसके अलावा विद्युत लाइट के झूले और लकड़ी, पीतल आदि के झूले भी कान्हा के लिए बाजार में मिल रहे हैं।