प्रतापपुरा वह इलाका है जहां शहर में सबसे पहले मोटर कार आई। सिर्फ यही नहीं, यहीं पर शहर का पहला पेट्रोल पंप खुला। हालांकि इतिहास की किताबों में इसका उल्लेख नहीं मिलता कि प्रतापपुरा का नाम किसके नाम पर रखा गया लेकिन इसके साथ कई दिलचस्प किस्से जुड़े हैं।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि वर्ष 1863 में यहां पहली मोटर कार आई। यह सरकारी कार थी। लोग उसे देखने के लिए आते थे। इसके बाद लाला खूबचंद ने मोटर पार्ट्स की शहर की पहली दुकान खोली। इसके बाद सिलसिला चल पड़ा। एक पारसी सेठ ने अजमेर रोड पर पेट्रोल पंप खोल लिया। नहर दफ्तर के इंजीनियर ने निजी कार खरीद ली। इसके बाद आगरा के रईसों ने भी कारें खरीदीं। दयालबाग के साहिबजी महाराज उस समय की सबसे महंगी रोल्स रॉयस कार खरीद लाए। छिली ईंट की घटिया के एडवोकेट पंडित कृष्णदत्त ने फ्रेंच कार सिंट्रोइन खरीदी।
शहर का पहला डाकखाना भी यहीं पर
प्रतापपुरा इलाके में ही वर्ष 1863 में आगरा क्लब खुला। उसी साल नहर का दफ्तर खुला। वर्ष 1905 में बड़ा डाकखाना बना। इस इलाके में बड़े बंगले थे। ये अंग्रेजों, नवाबों और पारसियों के थे। वर्ष 1857 के गदर से पहले पादरियों ने आगरा में बैपटिस्ट मिशन के दो प्रमुख केंद्र बनाए। इनमें से एक प्रतापपुरा में था, दूसरा इरादत नगर के चितौरा में।