डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे किशोरों को 35 की उम्र में ही गठिया होने का खतरा बढ़ जाता है। सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अतुल अग्रवाल ने बताया कि 16-30 साल के 823 लोगों पर अध्ययन किया। इनमें से 12 फीसदी के घुटनों, गर्दन, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी मिली।
थोड़ी दूर पैदल चलने पर सूजन, दर्द की दिक्कत बन रही है। लंबे समय तक बैठने से रक्त संचार नहीं होने से पैरों और जोड़ के आसपास सूजन भी मिली। गर्दन की हड्डी बढ़ने से दर्द और जकड़न की तकलीफ भी मिली।
इनकी दिनचर्या के बारे में पता किया तो ये मोबाइल-टीवी, लैपटॉप पर रोजाना 4-6 घंटे समय बिताते हैं। खेलकूद व शारीरिक गतिविधियां कम मिलीं। इनका वजन बढ़ा हुआ था, जिनमें से 3.8 फीसदी की उम्र तो 16 से 19 साल तक थी। इनमें संपन्न परिवारों के 88 फीसदी किशोर रहे। हालांकि फिजियोथेरेपी और व्यायाम से ये परेशानी ठीक हो जाती है।
केस-1: जयपुर हाउस के 16 साल के किशोर के पैरों में सूजन और दर्द रहने लगा। इसका वजन बढ़ा हुआ था। चिकित्सक को दिखाया तो फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम से परेशानी में आराम मिलने लगा।
केस-2: कमला नगर के 17 साल के किशोर के जोड़ में दर्द से चाल में अंतर आने लगा। इसको मोटापा है, खेलकूद की गतिविधियों से भी दूर रहता है। थोड़ा पैदल चलने पर ही दर्द होने लगता है। फिजियोथेरेपी चल रही है।
हड्डी रोगों से बचने के लिए ये करें
- 40 मिनट बैठने के बाद पांच मिनट चलें।
- कंप्यूटर-लैपटॉप को मेज पर रखकर प्रयोग करें।
- रोजाना 40-60 मिनट पैदल चलें, साइकिल चलाएं।
- एक ही मुद्रा देर तक न बैठें, आड़े-तिरछे ढंग से न बैठें।
- बच्चों और किशोरों को भागदौड़ वाले खेलकूद करवाएं।
- प्रोटीन, विटामिनयुक्त भोजन करें, फास्ट फूड से बचें।