आगरा। बालक के अपहरण के मामले में अभियोजन पक्ष एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं कर सका। तत्कालीन सीजेएम ने साक्ष्य के अभाव में 28 अक्तूबर, 2024 को घटना के 13 साल बाद आरोपी शकुंतला को बरी कर दिया। वादी पक्ष ने आदेश के खिलाफ अपील की। एडीजे-21 विराट कृष्ण श्रीवास्तव ने भी अधीनस्थ न्यायालय का आदेश यथावत रखा और गलती का जिम्मेदार अभियोजन पक्ष को माना है।
थाना ताजगंज में दर्ज हुई प्राथमिकी के अनुसार शंकरिया ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनका ढाई वर्ष का पुत्र 28 मार्च, 2011 को सुबह घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते लापता हो गया। आसपास के इलाके में तलाश करने पर भी कहीं नहीं पता चल सका। पूरे थाना क्षेत्र में माइक से पुत्र के गुम हो जाने का एनाउंसमेंट कराया। विवेचना के दौरान पुलिस ने थाना ताजगंज क्षेत्र की कैलाश टॉकीज के पास रहने वाली शकुंतला के कब्जे से पुत्र को बरामद किया गया। महिला को अदालत में पेश कर जेल भेजा गया था। पुलिस ने आधा दर्जन से भी अधिक लोग मुकदमे में गवाह बनाए थे। अभियोजन पक्ष एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं कर सका।