आगरा के 2219 परिषदीय स्कूलों में से 1120 स्कूल कायाकल्प के 19 मानकों पर अधूरे पाए गए हैं। कई स्कूलों में फर्नीचर, शौचालय में पानी, हैंडवॉश, किचन शेड और रनिंग वाटर जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है।
आगरा के परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प के दावों के बीच ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की तस्वीरों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 2219 परिषदीय स्कूलों में 1120 स्कूल कायाकल्प के 19 मानकों पर अधूरे यानी असंतृप्त मिले हैं। करीब आधे स्कूलों में अभी भी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कमियां हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इन कमियों को दूर कराने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय की है।
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जिलाधिकारी ने जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर सभी चिह्नित स्कूलों में कायाकल्प के 19 मानकों को पूरा कराएं। स्कूलों तक पहुंचने वाले मार्ग को गांव के मुख्य मार्ग से जोड़ने को प्राथमिकता दें।
फर्नीचर से लेकर पानी तक की कमी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में सबसे अधिक कमी फर्नीचर की सामने आई है। 363 स्कूलों में फर्नीचर, 265 स्कूलों के शौचालयों में पानी की व्यवस्था तक नहीं, 238 स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के अनुकूल शौचालय (सीडब्ल्यूएसएन), 217 में हैंड वॉशिंग यूनिट, 198 में किचन शेड, 224 में रनिंग वाटर और 125 स्कूलों में गेट के साथ चहारदीवारी का काम पूरा नहीं है। ब्लॉकवार आंकड़ों में फतेहाबाद सबसे पीछे है। यहां 268 में से 206 स्कूलों में कायाकल्प के मानक अधूरे हैं। फतेहपुर सीकरी में 139 में से 95, एत्मादपुर में 167 में से 86, जगनेर में 143 में से 70 और खंदौली में 145 में से 57 स्कूल असंतृप्त पाए गए हैं।