फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुले नाले कर रहे बीमारी: बदबूदार जहरीली गैसों के बीच रहने को मजबूर लोग, सांस-त्वचा रोग के हो रहे शिकार

Tue, 25 Aug 2026 10:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में खुले नालों के किनारे रहने वाले पांच लाख से अधिक लोगों की सेहत पर खतरा बताया जा रहा है। नालों की गंदगी और दुर्गंध के बीच लंबे समय तक रहने से सांस और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
 
विज्ञापन
पुनिया पाड़ा में खुले हुए नले के पास खेलते बच्चे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खुले नालों के किनारे घर बनाकर रह रहे पांच लाख से ज्यादा लोगों की सेहत पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बदबूदार नालों के किनारे लंबे समय तक रहने वाले लोग फेफड़ों और त्वचा रोग के शिकार बन रहे हैं। नालों से लगातार निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया और मीथेन जैसी जहरीली गैसें हवा में घुलकर लोगों के फेफड़ों को छलनी कर रही हैं।
विज्ञापन


लंबे समय तक इस दमघोंटू माहौल में सांस लेने वाले लोग एलर्जी, एक्जिमा जैसे त्वचा रोग के भी शिकार बन रहे हैं। उन्होंने खुले पड़े नालों को ढकने की मांग की है। मंटोला, काजीपाड़ा, जगदीशपुरा, लोहामंडी, खतैना, राजनगर, बोदला, धनौली, ताजगंज, भैंरो नाला समेत शहर में 18 बड़े नाले हैं जिनके किनारे रह रहे लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं।

नालों की सिल्ट में पनपने वाले सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर कई तरह के त्वचा रोग हो रहे हैं। बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन के 300 से ज्यादा मरीज एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन पहुंच रहे हैं। इसके अलावा निजी चिकित्सकों के पास जाने वाले मरीजों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।
विज्ञापन



डॉक्टर की बात
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि  खुले नालों के किनारे रहने वालों लोग डेंगू, मलेरिया के साथ फेफड़ों की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। सल्फर डाइऑक्साइड, मीथेन समेत अन्य गैसों के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर ये परेशानी हो रही है। नाले से रिसते गंदे पानी के कारण भूजल प्रदूषित होने से टाइफाइड समेत अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। 


एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. यतेंद्र चाहर का कहना है कि नालों में जमा कीचड़ के कारण किनारों पर रहने वाले लोग बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन के शिकार हो रहे हैं। फोड़े-फुंसी, दर्द, एलर्जी, खुजली आदि त्वचा की बीमारियां भी ज्यादा हैं। खासकर बच्चे ज्यादा शिकार होते हैं। 

लंगड़े की चौकी के पार्षद किशन नायक ने तगा ति बारिश में नाले उफनते हैं तो घरों में गंदा, काला बदबूदार पानी भर जाता है। इसी से पैरों, हाथों में फोड़े-फुंसियों की शिकायतें हो रही हैं। नाले की मरम्मत के साथ ही इसे ढक दिया जाए ताकि बदबू और गिरने की घटनाएं कम हो जाएं। 


नाला शाही कैनाल : तीन किमी लंबा और 12 से 15 फीट तक गहरा नाला है। ये न्यू आगरा से वाटरवर्क्स तक पहुंचता है। लंगड़े की चौकी में इसी नाले में बच्चों के गिरने, सफाई न होने पर भाजपा पार्षद ने केक काटकर अपना जन्मदिन मनाकर विरोध प्रदर्शन किया था।

पुनियापाड़ा नाला: ये किमी. लंबा और 8 से 10 फीट गहरा है। इसके दोनों ओर घर बने हुए हैं। बस्तियों से निकलने के कारण इनकी सफाई भी नहीं हो पा रही है। इससे कीचड़ में सूक्ष्मजीव पनपकर लोगों को शिकार बना रहे हैं।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें