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गेहूं खरीद: 1345 किसान खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने से रह गए वंचित

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कासगंज। सरकारी खरीद केंद्रों पर गेेहूं की खरीद बंद हो जाने के बाद जिले के 1345 किसान अपना गेहूं बेचने से वंचित रह गए हैं। प्रभावित किसान मायूस हैं। अब इन किसानों को गल्ला मंडी में सस्ते दामों पर अपना गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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जिला में गेहूं की खरीद के लिए 57 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। सरकार ने किसानों को उपज का अच्छा दाम देने के लिए इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये निर्धारित कर दिया है। जबकि मंडी में गेहूं का मूल्य लगभग 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। सरकारी दाम लगभग 375 रुपये क्विंटल अधिक होने से किसानों का रुझान सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए बढ़ने लगा।
13037 किसानों ने खरीद केंद्रों पर अपना गेहूं बेचने के लिए अपना पंजीकरण कराया था। कई केंद्रों पर काफी धीमी गति से गेहूं की खरीद की गई, जिससे किसानों को अपना गेहूं बेचने के लिए कई कई दिन तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। शासन से खरीद के लिए 22 जून अंतिम तिथि निर्धारित कर दी गई। इस तिथि तक सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीद की गई।
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अंतिम तिथि तक जिले के 11728 किसान अपना गेहूं खरीद केंद्रों पर बिक्री कर सके। एक दिन में खरीद का कोटा निर्धारित होने से अंतिम तिथि तक कई किसानों को अपना गेहूं बिक्री करने का मौका नहीं मिल सका। जिससे 1345 किसान अपना गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचने से वंचित रह गए। अब इन किसानों को गल्ला मंडी में अपना गेहूं सस्ते में बेचना पड़ेगा। मंडी में गेहूं का भाव सरकारी भाव से काफी कम होने से इन किसानों को आर्थिक क्षति होगी।
फैक्ट फाइल
पंजीकरण कराने वाले किसान 13037
गेहूं बिक्री करने वाले किसान 11728
गेहूं का सरकारी भाव 1975 रुपये प्रति क्विंटल
गेहूं का मंडी में भाव लगभग 1600 रुपये प्रति क्विंटल
खरीद केंद्रों पर मात्र उन्हीं किसानों का गेहूं नहीं खरीदा गया जो सरकारी मानक पर खरा नहीं उतर रहा था। शेष जो भी किसान अंतिम तिथि तक अपना गेहूं खरीद केंद्रों पर लेकर पहुुंचे उनकी फसल की खरीद कर योजना का लाभ दिया गया। -विजय कुमार शुक्ला, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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