कासगंज। डीजल पर मंहगाई की मार और बेमौसम बारिश की मार झेल रहे किसानों के लिए एनपीके एवं एनपी खाद के दामों में बढ़ोत्तरी ने परेशानी बढ़ा दी है। वहीं पहले की बुवाई का बीज खराब हो गया है। इससे किसानों को नई बुवाई करनी पड़ रही है। इससे किसानों को महंगाई और मौसम की दोहरी मार झेलने पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि इस तरह से एनपीके (नाइट्रोजन-फास्फोरस-पौटेशियम) एवं एनपी (नाइट्रोजन फास्फोरस) के दामों में वृद्धि ठीक नहीं हैं। एक ओर तो सरकार किसानों की आयु दोगुनी करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए उपयोगी खाद एवं डीजल के दामों पर लगातार वृद्धि हो रही है। जिले के किसानों ने दामों में कमी लाने की बात कही है। पोषक तत्वों के अनुपात के हिसाब से दो तरह की एनपीके खाद होती है। दोनों ही तरह के एनपीके के दामों में 265 रुपये प्रति 50 किलो की बोरी पर वृद्धि की गई है। नाइट्रोजन व फास्फोरस के साथ गंधक मिले एनपी खाद के दाम में 70 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बोरी वृद्धि की गई है।
डीजल पेट्रोल, बीज के दाम पहले से ही बढ़े हुए थे। अब एनपीके दामों में वृद्धि होने से फसलों की लागत बढ़ रही हैं। मौसम की मार से फसलें पहले ह खराब हो रही हैं। ऐसे में खाद के दामों में वृद्धि मुसीबत बढ़ाने वाली हैं। सरकार को खाद के दामों में कमी लाने के लिए उपाय करना चाहिए। -मोहर सिंह, नादरमई, किसान
खाद की जब जरूरत होती है तो किल्लत का सामना करना होता है। खाद तय रेट पर नहीं मिलती। अक्सर ब्लैक में ही लेनी पड़ती हैं। बेमौसम बारिश से धान की फसल बर्बाद हुई। रबी की फसल का बुवाई तो बारिश से बीज मारा गया। वहीं खाद के दाम बढ़ने से लागत बढ़ रही है। - रामकिशोर, बरसौली, किसान
आंकड़ों की नजर में-
उर्वरक का नाम नए निर्धारित रेट
एनपीके (10:26:26) 1440
एनपीके (12:32:16) 1450
एनपी (20:20:0:13) 1220