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कारगिल विजय दिवस: ..जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी

Thu, 26 Jul 2018 12:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मैनपुरी
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कारगिल युद्ध में शहीद हुए मैनपुरी के वीर सपूत - फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्ध में जनपद मैनपुरी के पांच वीर सपूत देश की खातिर कुर्बान हो गए थे, लेकिन विजय दिवस पर उनकी याद में कोई आयोजन तक नहीं किया जाता। केवल शहीदों के गांवों में बने उनके स्मारकों पर परिवार के लोग माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देते हैं। 
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इस मौके पर भी कोई जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद नहीं रहता। पूर्व सैनिक बाकल सिंह यादव का कहना है कि समाज के लोग ही जब शहीदों को भुला देंगे तो सीमा की रक्षा करने वाले सैनिकों का मनोबल कैसे बढ़ेगा। 

शहीदों के गांवों में बने शहीद स्मारक उनके बलिदान की गवाही दे रहे हैं। इन शहीदों के परिवारों को केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सहायता मिल चुकी है। इनके परिवार भी बेहतर स्थिति में हैं। लेकिन इनकी शहादत को लोग भुलाते जा रहे हैं। 
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तीन जून को शहीद हुए मुनीष

कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर के ग्राम गढ़िया घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार तीन जून को शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। 

शहीद मुनीश कुमार यादव के पिता वेदराम सिंह तथा मां सुशीला देवी गांव में रहती हैं। पत्नी मंजू देवी भरथना में बच्चों के साथ रहती हैं। वह भरथना में ही गैस एजेंसी का संचालन करती हैं। 

मुनीश के पिता वेदराम सिंह का कहना है कि शहीद परिवारों को सम्मान देने का दावा करने वाले नेताओं की असलियत सामने आ चुकी है। शहीदों के परिजनों को अभी तक कोई सम्मान नहीं मिला है।

शहीदों के परिजनों को खलती है ये बात

शहीद प्रवीण कुमार के परिजन - फोटो : अमर उजाला
वहीं, गांव अंजनी के ग्रेनेडियर सिपाही प्रवीन कुमार ने भी दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून को शहादत पाई थी। शहीद प्रवीन की पत्नी सुमन यादव कहती हैं कि जनपद में शहीदों के नाम पर कोई बड़ा आयोजन नहीं हो रहा है। 

देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वालों के लिए शासन व प्रशासन को कम से कम शहीद दिवस पर एक प्रदर्शनी का आयोजन करना चाहिए। इससे लोग उन शहीदों को याद कर सकें।       
 
शहीद प्रवीन की पत्नी सुमन यादव कहती हैं कि जनपद में शहीदों के नाम पर कोई बड़ा आयोजन नहीं हो रहा है। देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वालों के लिए शासन व प्रशासन को कम से कम शहीद दिवस पर एक प्रदर्शनी का आयोजन करना चाहिए। इससे लोग उन शहीदों को याद कर सकें। 

23 जुलाई को हेमचरन ने दिया बलिदान    

शहीद हेमचरन के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
कुरावली विकास खंड के गांव नगला आंध्रा के सिपाही हेमचरन सिंह ने 23 जुलाई को कई पाक सैनिकों को मार गिराने के बाद देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। गांव में बना शहीद स्मारक देश के लिए उनके बलिदान की याद दिलाता है। 

शहीद के पिता रामवृक्ष व माता रामश्री का कहना है कि शासन ने उनके शहीद पुत्र के नाम पर गांव में कॉलेज खोले जाने की बात कही थी, जिसके लिए उन्होंने जमीन का भी बंदोबस्त कर लिया था, लेकिन अभी तक कॉलेज नहीं खोला गया है। 

हेमचरन की पत्नी संगीता की 10 वर्ष पूर्व शिकोहाबाद में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके एक पुत्र तथा एक पुत्री है। बेटी शिल्पी नोएडा के एक कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है वहीं बेटा शुभम बीएससी कर रहा है। 

17 सालों तक धूल फांकती रही शहीद की प्रतिमा 

किशनी विकास खंड के गांव दिवन्नपुर साहिनी के ग्रेनेडियर हवलदार अमरुद्दीन ने दुश्मनों को करारा जवाब देते हुए तीन जुलाई को देश की सेवा करते हुए देश के लिए कुर्बान हो गए। उनके गांव में उनका स्मारक काफी वर्षों बाद इसी साल बन सका।  
     
शहीद अमरुद्दीन के परिजन भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। शहीद के बड़े पुत्र आरिफ ने बताया कि हमारे परिवार को सरकार ने वो सुविधाएं नहीं दीं जो अन्य शहीदों के परिजनों को दी गईं हैं। 

उन्होंने बताया कि प्रदेश के बाकी शहीदों को सरकारी भूमि के पट्टे दिए गये थे। उन्होंने कई बार अधिकारियों से इस बारे में बात की पर उन्हें आजतक एक इंच भी जमीन का पट्टा नहीं दिया गया।
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दूसरी पीड़ा शहीद के परिवार को है कि 17 सालों तक तत्कालीन विधायक द्वारा प्रदान की गई आदमकद प्रतिमा उनके ही गोदाम में धूल फांकती रही। प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी उन्हें दो गज जमीन मुहैया नहीं कराई गई। बाद में शहीद की बेवा मोमना बेगम ने अपने ही गैस गोदाम के सामने हाईवे के किनारे उनकी प्रतिमा को स्थापित कराया।

वहीं, घिरोर विकास खंड के गांव शाहजहांपुर के पैरानायक सत्यदेव सिंह ने 24 जुलाई 1999 को देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्होंने 18 पाक घुसपैठियों को मार गिराया था। गांव में उनका स्मारक उनकी वीरता की कहानी सुनाता नजर आता है।
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