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कृष्ण की नगरी में 'कंस' को मारने के लिए लाठियों को पिलाया जा रहा तेल, 22 नवंबर से शुरू होगा मेला

Fri, 20 Nov 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

  • कंस वध मेले की तैयारियों में जुटा चतुर्वेदी समाज 
  • मेले के तहत 24 नवंबर होगी कंस वध लीला
  • कंस वध के लिए लाठियों को किया जा रहा तैयार
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कंस वध मेले का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीकृष्ण की नगरी में कंस को झूरने (मारने) के लिए लाठियों को तेल पिलाया जा रहा है। मथुरा में 22 नवंबर से 26 नवंबर कंस वध मेले का आयोजन होगा। 24 नवंबर को कंस वध लीला होगी। इसी दिन शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। इसे लेकर खास तैयारियां चल रही हैं। 

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श्री माथुर चतुर्वेद परिषद की ओर से हर साल कंस वध मेले का आयोजन किया जाता है। इसके लिए कई महीने पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कंस के पुतले को पीटने के लिए लाठियां तैयार की जाती हैं। यमुना के विश्राम घाट पर लाठियों की बिक्री हो रही है। लाठियों को तेल पिलाकर मेहंदी से सजाया जा रहा है। 

कंस वध मेला 22 नंवबर से परंपरागत तरीके से शुरू हो जाएगा। इस दिन सुबह 10 बजे से विश्राम घाट पर गोचारण लीला, 23 को कवि सम्मेलन, 24 को कंस वध और 26 नवंबर को सायं चार बजे से यमुना जी में दीपदान महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 

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रात को विश्राम घाट पर होगी आतिशबाजी

मेले के तहत 24 नवंबर को शाम चार बजे छत्ता बाजार स्थित हनुमान गली से कृष्ण बलराम की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें कृष्ण बलराम के स्वरूप कंस को मारने के लिए ग्वालवालों के साथ निकलेंगे। चतुर्वेदी समाज के लोग लट्ठ लेकर शोभायात्रा में शामिल होंगे। 

कंस टीले पर कंस के पुतले को लाठियों से मारेंगे। कंस को मारने के बाद टीले से विजय जुलूस के रूप में झांकियों के साथ निकालेंगे। इसके बाद रात को विश्राम घाट पर आतिशबाजी की जाएगी। इस मेले में हर साल देश-विदेश रहने वाले चतुर्वेदी समाज के लोग शामिल होते हैं। 
 
माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने बताया कि यह प्रथा भगवान कृष्ण के समय से चल रही है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का वध किया था। प्रथा का पालन करते हुए शोभायात्रा निकाली जाती है। साथ ही इसमें कृष्ण-बलराम के स्वरूप होते हैं। हाथ में लाठियां लिए चतुर्वेदी समाज के लोग कंस टीले पर पहुंचते ही उसके पुतले को युद्ध के लिए ललकारते हैं। इसके बाद पीट-पीट कर ढेर कर देते हैं।

माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी ने बताया कि कंस वध मेले की तैयारियों के लिए चतुर्वेदी समाज के लोग महीने भर पहले से जुटे हुए हैं। कंस के पुतले को मारने के लिए लाठियां राजस्थान के अलवर, कोसी और मिर्जापुर से मंगाई हैं। 
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