मेले के तहत 24 नवंबर को शाम चार बजे छत्ता बाजार स्थित हनुमान गली से कृष्ण बलराम की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें कृष्ण बलराम के स्वरूप कंस को मारने के लिए ग्वालवालों के साथ निकलेंगे। चतुर्वेदी समाज के लोग लट्ठ लेकर शोभायात्रा में शामिल होंगे।
कंस टीले पर कंस के पुतले को लाठियों से मारेंगे। कंस को मारने के बाद टीले से विजय जुलूस के रूप में झांकियों के साथ निकालेंगे। इसके बाद रात को विश्राम घाट पर आतिशबाजी की जाएगी। इस मेले में हर साल देश-विदेश रहने वाले चतुर्वेदी समाज के लोग शामिल होते हैं।
माथुर चतुर्वेद परिषद के मुख्य संरक्षक महेश पाठक ने बताया कि यह प्रथा भगवान कृष्ण के समय से चल रही है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का वध किया था। प्रथा का पालन करते हुए शोभायात्रा निकाली जाती है। साथ ही इसमें कृष्ण-बलराम के स्वरूप होते हैं। हाथ में लाठियां लिए चतुर्वेदी समाज के लोग कंस टीले पर पहुंचते ही उसके पुतले को युद्ध के लिए ललकारते हैं। इसके बाद पीट-पीट कर ढेर कर देते हैं।
माथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी ने बताया कि कंस वध मेले की तैयारियों के लिए चतुर्वेदी समाज के लोग महीने भर पहले से जुटे हुए हैं। कंस के पुतले को मारने के लिए लाठियां राजस्थान के अलवर, कोसी और मिर्जापुर से मंगाई हैं।