निंबार्की संत हंसदास, शिष्य वंशीदास की साधना स्थली विलासगढ़ पर लीला का आयोजन किया गया। द्वापरकालीन लीला देखकर भक्त भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर हो गए।
मथुरा के बरसाना में बूढ़ी लीला महोत्सव के दूसरे दिन भगवान राधा-कृष्ण की प्राचीन बाल लीला स्थली विलासगढ़ पर रासविलास एवं जोगिन लीला का आयोजन किया गया। लीला के मंचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने राधा के दर्शन करने के लिए जोगिन का रूप धारण किया। अद्भुत लीला को देख भक्त आनंदित हो उठे।
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मंगलवार को निंबार्की संत हंसदास, शिष्य वंशीदास की साधना स्थली विलासगढ़ पर लीला का आयोजन किया गया। प्रबंधक वृंदावन बिहारी ने स्वामी मनोज चिकसौली वालों की रासमंडली के कलाकरों से लीला का आयोजन कराया। पर्वत पर स्थित प्राचीन रासमंडल चबूतरे पर राधाकृष्ण के स्वरूपों द्वारा मयूर लीला व युगल नृत्य को देख भक्त भाव विभोर हो गए। बाबा हंसदास द्वारा लिखी जोगिन लीला प्रस्तुत की गई।
क्या है जोगिन लीला
इसमें श्रीकृष्ण जोगिन का रूप धर कर वृषभान नंदिनी के दर्शन को उनके महल में आते हैं। जोगिन रूप में श्रीकृष्ण आवाज लगाते हैं, कोई अपने नक्षत्र और ग्रह दिशा दिखवाले, आवाज सुन कर राधाजी की प्रधान सखियां ललिता व विशाखा कृष्ण को दरबार ले आती हैं। वहां श्रीकृष्ण राधा की भाग्य रेखा देख कहते हैं कि तुम्हारा विवाह नंद के लाला से होगा। सखियां और राधा जोगिन बने कान्हा को पहचान जाती हैं। जब राधाजी पूछती हैं कि तुमने यह रूप क्यों धारण किया तो श्रीकृष्ण कहते हैं कि आपके दर्शन के लिए।
चोटी बंधन व नौका बिहार लीला बुधवार को
बुधवार की दोपहर सांकरी खोर में चोटी बंधन लीला व शाम पांच बजे गाजीपुर में स्थित प्रेम सरोवर पर राधा कृष्ण की नौका विहार लीला का आयोजन किया जाएगा।