आगरा में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल के खिलाफ विपक्ष की तख्ता पलट की कवायद धरी रह गई। हंगामा और तोड़फोड़ के चलते पीठासीन अधिकारी (सिविल जज, सीडी) शैलेंद्र कुमार वर्मा ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बुलाई गई बैठक स्थगित कर दी। अब फैसला हाईकोर्ट के निर्णय पर निर्भर है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से जिला पंचायत परिसर में बैठक बुलाई गई थी। मगर, 11:30 बजे तक एक भी सदस्य बैठक में नहीं पहुंचा। दोपहर लगभग पौने बारह बजे जिला पंचायत सदस्य चौधरी यशपाल के नेतृत्व में सदस्यों से भरी बस बालूगंज स्थित कार्यालय के बाहर पहुंची।
उन्होंने निरक्षर और दिव्यांग सदस्यों के लिए जिला प्रशासन से हेल्पर की मांग की। इसके लिए पूर्व में आवेदन न करने पर मौके पर मौजूद अपर जिलाधिकारी नगर केपी सिंह हेल्पर देने से मना से कर दिया। इसको लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्य और उनके समर्थकों ने गेट पर हंगामा कर दिया।
सांसद कठेरिया के खिलाफ नारेबाजी
पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ इटावा सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया के खिलाफ नारेबाजी की। लगभग आधा घंटे तक यहां हंगामा चलता रहा। हेल्पर ले जाने की अनुमति मिलने पर सदस्य अंदर गए। यहां भी पहुंचते ही उन्होंने फिर से हंगामा कर दिया।
कक्ष में रखी कुर्सियों को तोड़ दिया। इसको देखते हुए पीठासीन अधिकारी ने बैठक को ही स्थगित कर दिया। इसकी सूचना अपराह्न तीन बजे सदस्यों को दी गई, इसके बाद ही उन्हें पंचायत कार्यालय से जाने दिया। प्रबल प्रताप सिंह और उनके समर्थक सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे।
आपस में मारपीट करने लगे सदस्य
पीठासीन अधिकारी द्वारा डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि निर्धारित समय पर बैठक शुरू कर दी गई थी। निर्धारित समय तक कोरम (गणपूर्ति) आवश्यक सदस्य बैठक कक्ष में उपस्थित नहीं हुए। कुछ समय बाद कुछ सदस्य अचानक पहुंचे और हंगामा करने लगे।
कुर्सी तथा राजकीय संपत्तियों को तोड़ने लगे। सदस्य आपस में गाली-गलौज व मारपीट करने लगे। इससे जानमाल का खतरा उत्पन्न हो गया। घोर अराजकता तथा अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी।
बैठक स्थगित होने से अविश्वास प्रस्ताव पर न तो बहस हो सकी और न ही मतदान। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित है। जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार का कहना है कि पीठासीन अधिकारी की रिपोर्ट को हाईकोर्ट भेजा जाएगा। कोर्ट के निर्देश पर ही अगला कदम उठाया जाएगा।