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यूपी: 'किसी ऐरे-गैरे के आगे नहीं झुकने वाले', जैंगारा में दिखी रालोद का ताकत; जयंत चौधरी ये बोले

Mon, 12 Oct 2026 03:18 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

जैंगारा में स्वाभिमान सभा को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने हार और जीत दोनों देखी हैं और यहां आकर अच्छा लग रहा है। उन्होंने क्षेत्र के स्वाभिमान, रालोद के संघर्ष और कार्यकर्ताओं की ताकत पर जोर दिया।
 
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जयंत चौधरी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के जैंगारा मेंराष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने स्वाभिमान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यहां आकर अच्छा लग रहा है, क्योंकि उन्होंने हार और जीत दोनों देखी हैं। उन्होंने कहा कि सामने बैठे लोग संगठन की ताकत को जानते थे।
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जयंत चौधरी ने कहा कि इस क्षेत्र के लोग झुकना नहीं जानते, बल्कि देश के लिए जान देने वाले और मिट्टी के आगे झुकते हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी "ऐरे-गैरे" के आगे नहीं झुकने वाले हैं, इसीलिए इस सभा को स्वाभिमान से जोड़ा गया है।

उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों ने ऐसे बयान दिए जिनका कोई असर नहीं हुआ, और अब इस बात पर रोष है कि वे ऐसा क्यों कहा गया। उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी कीमत बताई जा रही थी।
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जयंत चौधरी ने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब लोकदल के विधायक कम थे, तब भी वे राज्यसभा जीत रहे थे, लेकिन अबकी बार केवल एक विधायक भेज पा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के 99 विधायकों की तुलना में रालोद के एक विधायक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक विधायक के आने से ही राजस्थान में सरकार बनी।

उन्होंने कहा कि रालोद का कार्यकर्ता कहता है कि उसने संघर्ष किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि रालोद में परिपक्व नेता और कार्यकर्ताओं की सेना है। अंत में उन्होंने कहा कि शायद यह उनकी किस्मत है। 



जयंत चौधरी ने कहा कि जैंगरा एक छोटा गांव है, लेकिन यहां से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दल को जीत मिली है। बगलभूसा गांव में भी नेताओं ने एक विशेष गांव को चुना है। आगरा के बारे में कहा गया कि आगरा में सदियों पहले ताजमहल का निर्माण किया था, जिसे आज कोई दोहरा नहीं पाया है। आगरा में जूते बनाने का एक बड़ा उद्योग है, जिसमें 300 करोड़ रुपये की जोड़ी जूते बनते हैं और लगभग 4 लाख परिवार इससे जुड़े हुए हैं। आगरा पेठा भी एक प्रसिद्ध उत्पाद है।


किसानों के दृष्टिकोण से, खेती को फायदे का सौदा नहीं माना जाता है। अन्य व्यवसायों में निवेश लाभ पर आधारित होता है, लेकिन खेती में ऐसा नहीं है। कैफ खान का उदाहरण दिया गया, जिसने 10वीं कक्षा के बाद पेंटिंग शुरू की, मारुति से ट्रेनिंग ली और शंघाई में विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया। 


मथुरा की सांसद के बारे में कहा गया कि उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) को देखने के लिए किसी को नहीं कहा, जबकि आईटीआई को खेती के बजाय तकनीकी शिक्षा का स्थान माना जाना चाहिए। दुनिया भारत के कौशल की मांग कर रही है और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ITI में 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

खेती-किसानी के महत्व पर जोर दिया गया। एथेनॉल के विरोध को किसानों का विरोध बताया गया, क्योंकि एथेनॉल किसानों की फसल से ही बनता है। आलू उगाने वाले क्षेत्रों में एथेनॉल बनाने की योजना है, जिसके लिए सब्सिडी दी जाएगी और 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की जाएगी।
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