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श्रीमद्भागवत कथा: जया किशोरी ने दिया संदेश, भगवान का सम्मान करें, उपहास नहीं; परिश्रम की कमाई ही असली संपत्ति

Wed, 29 Jul 2026 09:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जया किशोरी ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आस्था, सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 'सॉरी' शब्द गलतियों का लाइसेंस नहीं बनना चाहिए।
 
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जया किशोरी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचिका जया किशोरी ने कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान की लीलाओं को सांसारिक नहीं बल्कि भगवत दृष्टि से देखने का आह्वान किया। कथा के विभिन्न प्रसंगों पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल राधे-कृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।
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कथा व्यास ने कहा कि आज मनुष्य दुख के समय भगवान को याद करता है लेकिन परिस्थितियां अनुकूल होते ही उपहास करने लगता है। यदि हम स्वयं अपने आराध्य का सम्मान नहीं करेंगे तो समाज भी उनका सम्मान नहीं करेगा। भगवान के नाम पर होने वाले अनुचित मजाक का समर्थन न करने और ऐसी सभाओं से दूर रहने का संकल्प भी श्रद्धालुओं को दिलाया। कंस वध प्रसंग के दौरान श्रीकृष्ण के स्वरूप के दर्शन होते ही श्रद्धालु जयकारे लगाने लगे।

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उन्होंने कहा कि जीवन में परिश्रम से अर्जित धन ही वास्तविक संपत्ति है और किसी के अधिकार का हनन नहीं करना चाहिए। कथा के अंत में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव के प्रसंग सुनाया। इस मौके पर बाबू रोशनलाल गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, राधा गुप्ता, विकास मांगलिक, जयश्री मांगलिक, अनिल गुप्ता, विनीत मांगलिक, ऋषिक मांगलिक, अर्पित गुप्ता, अंजू मांगलिक, तनु मांगलिक, रेखा गुप्ता, आकांक्षा गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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सॉरी बोलना गलतियों का लाइसेंस नहीं
सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर विचार रखते हुए कथा व्यास ने कहा कि आजकल सॉरी शब्द ने युवाओं को गलतियां करने की छूट दे दी है। कहा कि प्रेम का अर्थ सम्मान और जिम्मेदारी है। विवाह जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी समझदारी और परिपक्वता के साथ होना चाहिए। बेटा-बेटी दोनों को जीवन की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना परिवार का दायित्व है।
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