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Janmashtami 2024: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पद्मकान्ति पुष्प बंगले में विराजेंगे कान्हा, जानें क्या हैं तैयारी

Sat, 24 Aug 2024 01:29 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

 श्रीकृष्ण का 5251वां जन्म महोत्सव 26 अगस्त को मनाया जाएगा। कान्हा इस बार पद्मकान्ति पुष्प बंगले में विराजेंगे। इससे पहले ठाकुरजी के जन्माभिषेक कामधेनु स्वरूपा गऊ द्वारा
 
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर की गई भव्य सजावट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का 5251वां जन्म महोत्सव शास्त्रीय विधि एवं मंदिर परंपराओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी पर 26 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार ठाकुरजी पद्मकान्ति पुष्प बंगले में विराजेंगे। सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करेंगे। इससे पहले ठाकुरजी के जन्माभिषेक कामधेनु स्वरूपा गऊ द्वारा रात 12.10 बजे से रात्रि 12.25 बजे तक होगा। आराध्य श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने शुक्रवार को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के 5251 वें जन्म महोत्सव को भव्य और दिव्य बनाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। मंदिर की साज-सज्जा एवं व्यवस्थाएं अभूतपूर्व होंगी। कंस के कारागार के रूप में प्रसिद्ध श्रीगर्भगृह एवं श्रीकृष्ण चबूतरा की साज-सज्जा भक्तों को द्वापरकालीन कंस के कारागार की अनुभूति कराएगी। कारीगरों द्वारा श्रीकृष्ण चबूतरा एवं गर्भगृह को कारागार के रूप में सजाया जा रहा है।

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26 अगस्त को सुबह शहनाई एवं नगाड़ों के ध्वनि के मध्य भगवान की मंगला आरती के दर्शन सुबह 5.30 बजे से होंगे। इसके बाद 8 बजे भगवान का पंचामृत अभिषेक होगा। इस बीच स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्पार्चन होगा। सुबह 9 बजे भागवत भवन में भगवान राधाकृष्ण का कमल-पुष्प एवं तुलसीदल से पुष्पार्चन, मंगलार्चन एवं वेदमंत्रों के मध्य किया जाएगा।

 

जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात 11 बजे श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से आरंभ होगा। 1008 कमल-पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्त्रार्चन होगा। रात्रि 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, मृदंग के भक्तजन झूम उठेंगे। भगवान के जन्म की महाआरती रात 12.10 बजे तक होगी। केसर एवं सुगंधित द्रव्यों से लिपटे हुए भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल ले जाया जाएगा। यहां स्वर्ण मढित चांदी की गऊ से रात्रि 12.10 बजे से 12. 25 बजे तक भगवान के श्रीविग्रह का प्रथम अभिषेक करेंगी। इसके बाद श्रीठाकुरजी को अभिषेक स्थल पर रजत कमल में विराजमान कर जन्म महाभिषेक रात 11.25 बजे से 12. 40 बजे होगा। यह महाभिषेक श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज के सानिध्य में जन्माभिषेक पंचामृत दूध, दही, घी, बूरा, शहद, औषधियों, इत्रों से किया जाएगा। इसके बाद ठाकुरजी की शृंगार आरती रात 12.45 बजे से 12.50 बजे तक होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में श्रद्धालुओं का प्रवेश रात 1.30 बजे तक होगा।

 

मेवा के लड्डू और पाग का लगेगा भोग
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भगवान का लड्डू एवं मेवा-पाग का भोग लगेगा। मंदिर की रसोई में भगवान का भोग कारीगरों द्वारा रात दिन तैयार किया जा रहा है। इसमें मेवे, कूटू, गोंद एवं मिंगी के लड्डू बनाए जा रहे हैं।

 

नगर में धूमधाम से निकलेगी शोभायात्रा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 26 अगस्त को श्रीकृष्ण लीला महोत्सव समिति द्वारा परंपरागत शोभायात्रा भरतपुर गेट से शाम छह बजे से शुरू होगी। जो कि होलीगेट, छत्ता बाजार, स्वामीघाट, चौक बाजार, मण्डी रामदास, डीगगेट होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पहुंचेगी।

 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान के गेट से 25 को निकलेगी शोभायात्रा
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से उत्तर प्रदेश ब्रजतीर्थ विकास परिषद द्वारा 25 को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से कलाकार अपना प्रदर्शन करेंगे। शोभायात्रा श्रीकृष्ण जन्म स्थान के गेट एक से निकाली जाएगी।

 

पीले रंग की सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करेंगे भगवान
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुरजी पीले रंग की सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करेंगे। मथुरा में तैयार हुई ठाकुरजी की विशेष पोशाक कोलकाता और गुजरात के कारीगरों के सहयोग से तैयार हुई है। पोशाक बनाने में पांच से अधिक कारीगरों को चार माह का समय लग गया। सोमरस यानी वनस्पतियों का अर्क होता। इसी थीम को लेकर रेशम के कपड़े पर वनस्पतियां, बेल-बूटे उकेरे गए हैं।
 
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संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीराधाकृष्ण सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करके भक्तों को दर्शन देंगे। नवरत्न जड़ित स्वर्ण कंठाहार भी श्रीठाकुरजी को धारण कराया जायेगा। दिव्य पोषाक 25 की शाम छह बजे शोभायात्रा, घंट-घड़ियाल, झांझ-मंजीरे, मृदंग और डमरू की मंगल ध्वनि के मध्य को अर्पित की जाएगी। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान चतुर्भुज नारायण के श्रीविग्रह की भी पोषाक विशेष होगी। भगवान केशवदेव, श्रीगर्भगृह, श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार एवं भगवती योगमाया के श्रीविग्रह के लिए जरदोजी का कार्य, रेशम, जरी, रत्न-प्रतिकृति आदि के साथ सिल्क के वस्त्र पर किया जा रहा है। जन्मोत्सव पर ठाकुरजी दिव्य मुकुट धारण करेंगे, भगवती योगमाया स्वर्ण मुकुट धारण कर भक्तों को दर्शन देंगी।
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