रविवार सुबह इनका पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा। यहां सैन्य सम्मान के साथ इनका अंतिम संस्कार किया गया। आसपास के गांव के सैकड़ों लोग बलिदानी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। बताया कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा। हम शासन-प्रशासन से मांग करेंगे, जो भी सुविधाएं या लाभ एक बलिदानी के परिवार को मिलने चाहिए, सुखवाशी लाल के परिजन को मिलें।
बड़े भाई भी हैं बीएसएफ में जवान
रक्षपाल सिंह ने बताया कि हम पांच भाई हैं। जिनमें से सुखवाशी लाल तीसरे नंबर के थे। इनसे छोटे भाई की मौत हो चुकी है। सुखवाशी लाल से बड़े भाई अजयपाल भी बीएसएफ में जवान हैं। दोनों भाइयों की बचपन से ही सेना में नौकरी करने की चाह थी। इसी कारण 1999 में वह बीएसएफ में भर्ती हो गए थे।