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जयपुर हाउस : यूपी और राजस्थान सरकार की आपत्ति के बाद भी काट दिए प्लॉट

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आगरा। राजस्थान सरकार ने आगरा के जयपुर हाउस में मौजूद संपत्ति पर जयपुर रियासत का नाम दर्ज कराने के लिए कहा है। इस मामले में वर्ष 1952 से 1955 के बीच आगरा के डीएम, कमिश्नर, आगरा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और प्रदेश सरकार के बीच चले पत्राचार से खुलासा हुआ है कि राजस्थान सरकार ने जयपुर एस्टेट की 100 बीघा जमीन और दोनों कोठियों के अधिग्रहण के आगरा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की कवायद पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
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तीन साल तक चली जयपुर हाउस के अधिग्रहण की फाइल पर तब यूपी सरकार ने आगरा-मेरठ के तत्कालीन आयुक्त को अधिग्रहण की कार्रवाई स्थगित करने के निर्देश दिए थे। इसमें स्पष्ट था कि राजस्थान सरकार ने संपत्तियों के केवल उपयोग की अनुमति शर्तों पर दी है, अधिग्रहण के लिए नहीं। प्रदेश सरकार के उपसचिव एए रिजवी ने जुलाई 1955 में आगरा के कमिश्नर को पत्र में लिखा कि 20 अक्तूबर 1951 को आगरा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को जयपुर हाउस विकास योजना के लिए तकनीकी स्वीकृति दी गई थी।
ट्रस्ट औपचारिकता पूरी कर सरकार के सामने अनुमोदन ले पाता, उससे पहले ही राजस्थान सरकार ने इस योजना में शामिल जयपुर हाउस की संपत्ति के अधिग्रहण पर आपत्ति जता दी। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि राजस्थान सरकार और जयपुर रियासत ने यूपी सरकार की काफी मदद की है, इसलिए अधिग्रहण को स्थगित कर दिया जाए। ट्रस्ट ने भूमि अधिग्रहण, मुआवजे की गणना में त्रुटियां की हैं।
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4 लाख में खरीद का प्रस्ताव, 7 रुपये गज में भूखंड की बिक्री
वर्ष 1952 से 1955 तक चले पत्राचार में ट्रस्ट ने कहा कि जयपुर हाउस के अधिग्रहण के लिए दो लाख रुपये मुआवजा होना चाहिए लेकिन यह 3,40,000 से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर चार लाख भी मांगे जाएंगे तो भी आवासीय योजना आर्थिक रूप से ठीक रहेगी। ट्रस्ट इस जमीन में विकसित भूखंड तब 7 रुपये प्रति गज की दर से बेच देगा। इस पर प्रदेश सरकार ने आपत्ति लगाई थी कि यह सबसे महंगी योजना है। अगर विकसित भूमि न बिकी तो बिना बिके जमीन छोड़नी होगी। लोगों के लिए 7 रुपये गज की जमीन खरीदना ज्यादा होगी।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का था कार्यालय
31 मार्च 1952 को यूपी सरकार के सहायक सचिव हारुन अहमद ने तत्कालीन डीएम को पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि राजस्थान सरकार की संपत्तियों का बड़ा हिस्सा जयपुर हाउस आवासीय योजना में शामिल है। राजस्थान सरकार ने ट्रस्ट की योजना में अपनी संपत्ति के अधिग्रहण पर कड़ी आपत्ति जताई है। यहां खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यालय है। इसे खाली नहीं कराया जा सका। जयपुर राज्य और राजस्थान सरकार ने अतीत में यूपी सरकार की मदद की है और इन संपत्तियों के उपयोग की अनुमति आसान शर्तों पर दी है। इसलिए योजना स्थगित की जाए।

नगर महापालिका कार्यालय बनाने का दिया प्रस्ताव
18 जनवरी 1954 को ट्रस्ट के प्रशासक केएन सिंह ने पत्र लिखा कि मौजूदा नगरपालिका भवन बहुत छोटा है और ट्रस्ट के पास भी भवन नहीं है। ऐसे में जयपुर हाउस के दोनों भवनों में नगरपालिका कार्यालय और ट्रस्ट का कार्यालय खोला जा सकता है। नगर पालिका के पास कोई हॉल भी नहीं है। इसलिए जयपुर हाउस का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें सुंदर हॉल है। यहां बैठकें हो सकती हैं। इन भवनों के पास विशाल परिसर है जहां घर बनाए जा सकते हैं। इतना बड़ा परिसर कोई व्यक्ति नहीं खरीद सकता इसलिए यहां कार्यालय खोल दिया जाए।
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