ताजनगरी के नौ विधायकों में मंत्री पद की दौड़ में तीन का नाम बड़ी तेजी से चला। जगन प्रसाद गर्ग, योगेंद्र उपाध्याय और रानी पक्षालिका सिंह। इनमें जगन की संभावना तो शनिवार की रात तक भी बनी रही। लेकिन रविवार की दोपहर को कहानी एकदम से बदल गई। सुबह कुछ उम्मीद लग रही थी लेकिन दोपहर को सूची आई तो जगन का नाम इसमें शामिल नहीं था। तीनों विधायकों के सपने सच होने से रह गए। कारण यह बताया जा रहा है कि इनके मुकाबले ब्रज से मंत्री बनाए गए विधायकों का नाम बड़ा है।
भाजपा के ब्रज क्षेत्र में आगरा से बरेली तक के 12 जिले आते हैं। इनके हिसाब से लाल बत्तियों का बंटवारा हुआ। इनमें जातिगत समीकरण देखे गए। विधायकों का कद भी देखा गया। उत्तर सीट से लगातार पांचवी बार जीते जगन प्रसाद गर्ग की दावेदारी मजबूत थी। आखिरी समय तक उनका नाम भी चला लेकिन वैश्य समाज के एक ही मंत्री पद देना था। ऐसे में बरेली के विधायक राजेश अग्रवाल भारी पड़ गए। वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं। उन्हें अनुभव का लाभ मिला।
इसी तरह ब्रज में एक ब्राहमण मंत्री बनाया जाना था। आगरा की दक्षिण सीट से जीते योगेन्द्र उपाध्याय का भी दावा मजबूत था लेकिन मथुरा से जीते श्रीकांत शर्मा बड़ा कद और बड़ा नाम होने के चलते बाजी मार ले गए। आगरा से तीसरा नाम बाह से जीतीं भदावर घराने की बहू रानी पक्षालिका सिंह का था। उनके पति अरिदमन सिंह सपा और भाजपा सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। क्षत्रिय समाज के कोटे में पक्षालिका का नाम था लेकिन और भी कई दावेदार थे। उनका खेल बन गया, पक्षालिका के अरमां टूट गए।
एत्मादपुर में पहली बार कमल खिलाने वाले राम प्रताप सिंह चौहान की दाल भी नहीं गल पाई। भाजपा नेताओं ने फतेहपुर सीकरी से जीते चौधरी उदयभान का नाम भी चलाया । वह सीनियर हैं। जाट कोटे में उन्हें एडजस्ट किया जा सकता था लेकिन उन पर भारी पड़ गए मथुरा की छाता सीट से जीते लक्ष्मीनारायण। वह बसपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसका उन्हें लाभ मिला।
इसी तरह एसपी सिंह बघेल के आगे हेमलता दिवाकर और जितेंद्र वर्मा की दावेदारी कहीं नहीं टिक पाई। एक तो एसपी सिंह पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। दूसरा जितेंद्र वर्मा और हेमलता दिवाकर पहली बार विधायक बने हैं। ब्रज क्षेत्र से छह केबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। अतरौली से जीते पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को राज्यमंत्री बनाया गया है। आगरा को प्रतिनिधित्व न मिलने पर ब्रज क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल का कहना है कि यह आगरा की जनता के साथ अन्याय है।