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सपा के लिए चुनौती बना भितरघात, जिला पंचायत की कुर्सी गंवाने में ये बातें रहीं अहम

Wed, 27 Sep 2017 07:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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आगरा में राष्ट्रीय अधिवेशन करने जा रही अखिलेश के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के लिए भितरघात बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आगरा में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी जाना इसका उदाहरण है। इससे पहले अधिवेशन के पोस्टर में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष का फोटो न होने से भी चर्चा का बाजार गर्म है।  
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बता दें कि जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव का तख्ता पलट ऐसे ही नहीं हुआ बल्कि उनके करीबी सदस्यों ने भी मौका पड़ने पर उनका साथ छोड़ दिया। सत्ता की लहर में वह भी बह गए। दो साल पहले जिन सदस्यों ने उनको समर्थन दिया था, उनमें से आधे से ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव के साथ खड़े नजर आए। इसके चलते कुशल को जिला पंचायत की अविश्वास बैठक में बहुमत खोना पड़ा। 

दो साल पहले कुशल यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष का पद संभाला था। वह सपा की ओर से प्रत्याशी थीं और भाजपा से सांसद बाबूलाल चौधरी के पुत्र राकेश चौधरी थे। तब प्रदेश में सपा सरकार थी। कुशल यादव को 34 सदस्यों का समर्थन मिला था। 
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इसके चलते उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी मिली। इसमें सपा के समर्थन से चुनाव जीतने वाले सदस्यों के अलावा अन्य दलों के सदस्यों ने भी कुशल को वोट किया था। राकेश चौधरी को सिर्फ 17 वोट मिले थे।

हाईकमान से करेंगे शिकायत

विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद समीकरण बदलने लगे। कुशल के खिलाफ चार सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। 32 सदस्यों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में शपथ पत्र दिए। 21 दिन बाद मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बैठक में चार और सदस्य कुशल के खिलाफ खड़े हो गए, उनके पास खुद को मिलाकर 34 से घटकर 15 सदस्यों का समर्थन रह गया। 

जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि एवं कुशल यादव के पति राजपाल यादव का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद भी वह हार नहीं मानेंगे, वह संघर्ष करेंगे। उनका कहना है कि जिन लोगों ने भितरघात किया है, उसकी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेजेंगे।

राजपाल को मिली बेईमानी की सजा

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गनेश यादव ने राजपाल यादव पर निशाना साधा। कहा है कि राजपाल को बेईमानी की सजा मिली है। राजपाल ने वर्ष 2015 में बेईमानी से मुझे चुनाव हराया था, उसी तरह से आज उसके पास से अध्यक्ष पद चला गया। गनेश का कहना है कि राजपाल ने पार्टी को बदनाम किया है।  
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दोस्त भी जब दोस्त ना रहा

राजपाल यादव अपने मित्र हरेंद्र की मदद से अपनी पत्नी कुशल यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में कामयाब हुए थे। दोनों में अटूट दोस्ती थी। मगर, अध्यक्ष पद राजपाल के खाते में आने के बाद से दोनों में खटपट होने लगी थी।

नतीजतन दोनों को अलग-अलग होना पड़ा। हरेंद्र ने तभी से राजपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने भाजपाई खेमे से हाथ मिलाया और कुशल यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए। मंगलवार को तख्ता पलट कर राजपाल को जवाब भी दे दिया। 
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