मैनपुरी। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी बीमा कंपनी के भुगतान नहीं करने पर पीड़ित की ओर से दायर की गई याचिका पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा की धनराशि के दो लाख रुपये देने का आदेश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक को दिया है। यह धनराशि एक महीने के अंदर पांच प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देनी होगी।
शहर के मोहल्ला डीएन नगर राधा रमण रोड निवासी दशरथ सिंह ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी शाखा स्टेशन रोड से अपने पुत्र शरद भदौरिया और मयंक भदौरिया के नाम दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा चार जनवरी 1996 को कराया था। बीमा चार अप्रैल 2019 तक वैध था। बीमा में दशरथ सिंह की पत्नी एकता को नॉमिनी बनाया गया। 22 जुलाई 2004 को दशरथ सिंह की मौत हो गई। मयंक और शरद ने औपचारिकताएं पूरी करके बीमा की धनरशि पाने के लिए बीमा कंपनी में आवेदन किया।
कंपनी ने आपत्तियां लगाकर भुगतान करने से मना कर दिया। मयंक और शरद ने बीमा की धनराशि दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में याचिका दायर की। आयोग में दोनों ने प्रमाण भी प्रस्तुत किए। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने आयोग में अपना पक्ष रखा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुलश्रेष्ठ, सदस्य देवेंद्र गुप्ता ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग द्वारा सुनाए गए निर्णय में कहा गया नेशनल इंश्योरेंस कंपनी शाखा स्टेशन रोड के शाखा प्रबंधक एक महीने में दो लाख रुपये बीमा धारकों को अदा करें। इस धनराशि पर पंाच प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
दो हजार रुपये मिलेगा खर्चा
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुभाषचंद्र कुलश्रेष्ठ, सदस्य देवेंद्र गुप्ता ने दो हजार रुपये पीड़ित को खर्चा के रूप में देने का भी आदेश दिया है। आदेश में लिखा है पीड़ित को दो हजार रुपये मुकदमे का खर्चा दिया जाएगा। इस धनराशि पर कोई भी ब्याज नहीं दिया जाएगा।