शहर में हर एक कदम की दूरी पर पिल्ले ही पिल्ले, हमारे यहां पर हर नस्ल के पिल्ले मिलते हैं। इस तरह के बोर्ड दिखाई दे जाएंगे , जो ब्रीड शहर के पर्यावरण में पल भी नहीं सकती है। वह ब्रीड बड़ी आसानी से मोटे दाम देने के बाद मिल जाएगी। लेकिन, खरीदने वाला व्यक्ति कभी भी उस पेट शॉप मालिक से नहीं पूछता क्या उसके पास ब्रीडिंग का लाइसेंस है।
ये जागरूकता लोगों में आ जाए कि पिल्ले लेने से पहले ब्रीडिंग का लाइसेंस पूछ लें तो शायद श्वानों पर होने वाली क्रूरता रोकी जा सकती है। नगर निगम के पशु चिकित्सक अधिकारी डॉ. अजय सिंह यादव बताते हैं कि नगर निगम में अभी तक ब्रीडिंग लाइसेंस की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। न ही कोई ब्रीडर अभी तक हमारे पास पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकरण करा रजिस्ट्रेशन के लिए आया।
पशु प्रेमी विनीता अरोड़ा बताती है कि अप्रैल माह में जलेसर मार्ग के पास स्थित एक वीरान जगह से लैब्राडोर (स्वीटी) को मुक्त कराया। उस समय कई तरह की बीमारियों से जूझ रही थी । रॉटविलर को उसका मालिक पेट शॉप मालिकों को ब्रीडिंग करने के लिए किराए पर देता था, जिसके बदले में रुपये वसूलता था। शहर में ही कई बस्तियों में धड़ल्ले से ब्रीडिंग का धंधा चल रहा है। जब रेस्क्यू कराने जाते हैं, तो टीम को डराने का प्रयास किया जाता है।