रोमानिया के रास्ते वापस लाने की तैयारी
प्रांजल के पिता बसंत कुमार शर्मा बताया कि प्रांजल व अन्य मेडिकल छात्रों को पहले रोमानिया भेजा जाएगा। वहां से उन्हें भारत के लिए फ्लाइट उपलब्ध कराई जाएगी। यह जानकारी प्रांजल शर्मा को यूक्रेन में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने दी है। सभी छात्र भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं।
भारत सरकार का आभार जताया
केंद्र सरकार ने यूक्रेन में फंसे सभी भारतीयों को वापस लाने के लिए नि:शुल्क वायु सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। प्रांजल के पिता बसंत कुमार शर्मा और व्यापार मंडल के नेता अंबेश शर्मा ने भी केंद्र सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबरों पर बातचीत की। बातचीत के दौरान ही केंद्रीय नियंत्रण कक्ष द्वारा सभी भारतीयों को वापस लाने का खर्चा केंद्र सरकार द्वारा उठाए जाने का आश्वासन दिया गया।
टूंडला का छात्र ओडेशा शहर में फंसा
टूंडला के शक्तिनगर निवासी एडीओ रामशंकर सिंह का पुत्र आकाश सिंह यूक्रेन के ओडेशा शहर में मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसका फाइनल वर्ष है। रूस और यूक्रेन के मध्य युद्ध के हालात को देखकर आकाश ने भारत वापस आने के लिए फ्लाइट बुक कराई थी। एयर टिकट आठ मार्च की बुक है, लेकिन यूक्रेन के हवाई अड्डे को रूस ने ध्वस्त कर दिया है।
शुक्रवार दोपहर आकाश के पिता रामशंकर ने जब उससे वीडियो कॉल की तो उसने काट दिया, किंतु जब वायस कॉल की तो उसने बताया कि पापा यहां के हालात बहुत ही खराब होते जा रहे हैं...। हर घंटे धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है, लेकिन वे चिंता न करें। वह और उसके साथी भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। हमें जल्द ही अपने देश भेज दिया जाएगा।
बस बेटा घर आ जाए और कुछ नहीं चाहिए
आकाश की मां मालतीदेवी का रो रोकर बुरा हाल है। जब से यूक्रेन में युद्ध के हालात हुए हैं, वह टीवी पर हो रहे धमाकों को देखते हुए रोए जा रही हैं। इतना ही नहीं हर एक घंटे बाद वह पुत्र आकाश से बात कर रही हैं। परिजन के मुताबिक वह इकलौते बेटे की सलामती के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रही हैं। उनका कहना है बस बेटा घर आ जाए। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजकर यूक्रेन में फंसे सभी बच्चों को लाने की गुहार भी लगा रही हैं।
आकाश ने कहा, हमें ओडेशा से रोमानिया लाया जाएगा
आकाश ने फोन पर बातचीत में बताया कि कीव में लगातार हमले हो रहे हैं। हम यूक्रेन के पश्चिमी छोर में हैं। यहां भी अलर्ट जारी हो चुका है। जहां मैं हूं वह शहर कीव से लगभग 150 से 200 किलोमीटर दूर स्थित है। भारतीय दूतावास लगातार भारतीय मूल के छात्रों को यहां से बचाकर बाहर निकालने की जद्दोजहद कर रही है। हमें बस से रोमानिया ले जाया जाएगा। रोमानिया ओडेशा शहर से लगभग 700 किमी दूर है। रोमानिया पहुंचने के बाद हम सुरक्षित भारत के लिए रवाना हो सकेंगे।