ताजमहल के दीदार में बांग्लादेशियों ने पहली बार अमेरिकी पर्यटकों को पछाड़ दिया है। जनवरी से जुलाई के बीच विदेशी पर्यटकों की संख्या में 30 फीसदी की बढ़त हुई, लेकिन इनमें बड़ी भागीदारी बांग्लादेश के सैलानियों की रही है।
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करीब पांच फीसदी बढ़ोत्तरी इनकी संख्या में हुई है, जबकि दो दशक से दीदार ए ताज में अव्वल रहे अमेरिकी और ब्रिटिश सैलानियों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी ही हो पाई।
साल 2016 के मुकाबले इस साल के पहले सात महीनों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में करीब 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। देश में यह बढ़ोतरी महज 15.7 फीसदी की है। ताजमहल का दीदार करने वाले टॉप 10 देशों में बांग्लादेश इन सात महीनों में अव्वल रहा है।
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सितंबर में ही इतनी बढ़ी संख्या
ताजमहल
- फोटो : SELF
ताज देखने वालों में इस साल करीब 26 फीसदी बांग्लादेशी पर्यटक हैं। केवल सितंबर में ही पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी बांग्लादेशी सैलानियों में हुई है। दो दशक से अमेरिकी पर्यटक ताज पर सबसे ज्यादा आते रहे हैं, लेकिन इस साल यह संख्या मामूली ही बढ़ी। इसी तरह यूनाइटेड किंगडम से पर्यटक कम बढ़े, वहीं फ्रांस, मलेशिया, कनाडा, श्रीलंका, चीन, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर से पर्यटकों की संख्या कम रही।
दोकलम विवाद का ये असर
ताज महल
- फोटो : self
तीन महीने से गहराए रहे दोकलम विवाद के दौरान चीन के पर्यटकों ने ताजमहल का रुख नहीं किया। एडवाइजरी जारी होने और हर दिन तीखी बयानबाजी के कारण चीनी पर्यटकों के टूर कैंसिल भी हुए। जून से सितंबर के बीच चीन के पर्यटकों की संख्या काफी रहती है, लेकिन इस बार चुनिंदा पर्यटक भी ताज नहीं पहुंचे। देश में भी चीनी पर्यटकों की संख्या जुलाई में काफी कम रही।
पांच महीने दिखा नोटबंदी का असर
नोटबंदी
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शॉपिंग और घूमने पर नोटबंदी का तेज असर नजर आया, लेकिन मई के बाद भारतीय पर्यटकों की संख्या ताज पर बढ़ी। गर्मियों की छुट्टियों में ताज पर सैलानी घटे। पहले पांच महीनों में ताजमहल पर करीब आठ फीसदी कमी दिखी, लेकिन जून और जुलाई में भारतीय सैलानियों में बढ़ोतरी दर्ज होने लगी।
टूरिज्म गिल्ड के महासचिव राजीव सक्सेना के अनुसार नोटबंदी ने भारतीय पर्यटकों की कमर तोड़ दी थी। जिसका असर अप्रैल तक काफी नजर आया। विदेशी पर्यटकों में यूरोप, एशिया और आस्ट्रेलियाई महाद्वीप से कमी आई है, लेकिन बांग्लादेश के पर्यटक ज्यादा आ रहे हैं।