मासूम बच्चों को मौत के मुंह में धकेल रहे ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल का टास्क पूरा करने के लिए शहर की दो छात्राओं के भाग जाने की घटना के बाद पुलिस की नींद टूट गई है। एडीजी जोन आगरा अजय आनंद ने जोन के आठों जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में थाना प्रभारियों को भेजा जाए और बच्चों को जागरूक किया जाए। इस पर कई जगह पुलिस ने शुक्रवार से ही काम करना भी शुरू कर दिया।
बता दें कि आगरा की दो छात्राएं भोपाल से आगे होशंगाबाद से मिली थी। उनसे पूछताछ में पता चला कि उनके फ्रेंड सर्किल के छह और छात्र-छात्राएं ब्लू व्हेल के चंगुल में फंस चुके हैं। संख्या और भी हो सकती है। इसके मद्देनजर पुलिस ने यह कदम उठाया है।
एडीजी जोन ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को कप्तानों को माध्यम से यह हिदायत दी गई है कि इसमें लापरावाही न बरतें। तीन काम करने हैं। एक तो बच्चों को जागरूक करना है कि वे इस गेम के चक्कर में ही न पड़ें। दूसरा, गेम खेलने वाले बच्चों के लक्षण साफ नजर आते हैं। उन पर निगाह रखना जरूरी है।
पुलिस स्कूल संचालकों से कहेगी कि पूरा स्टाफ बच्चों पर नजर रखे। जिसमें भी लक्षण मिलें, उसकी काउंसलिंग की जाए। तीसरा, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूलों की ओर सो अभिभावकों तक भी इसका संदेश पहुंचाया जाए।
दो सगे भाई ब्लू व्हेल का शिकार होने से बचे
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- फोटो : blue whale
परिजनों की सतर्कता से दो सगे भाई ब्लू व्हेल गेम का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। फिरोजाबाद के प्रमुख स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले दोनों ही बच्चों को हाथ काटने का टास्क दिया गया था। बच्चे टास्क पूरा करते इससे पहले ही परिजनों की नजर उन पर पड़ गई।
उनके मोबाइल पर एक सप्ताह पहले ब्लू व्हेल गेम का लिंक आया। मोबाइल पर गेम खेलने के शौकीन दोनों छात्रों ने अपने मोबाइल पर इस खतरनाक गेम को डाउनलोड कर लिया। बच्चों को पहला टास्क हाथ काटने का मिला था। परिजनों की सतर्कता के कारण बच्चे टास्क पूरा नहीं कर सके। परिजनों ने तुरंत मोबाइल से ब्लू व्हेल गेम डिलीट कर बच्चे के साथ होने वाली किसी अनहोनी से निजात पाई।
आपका बच्चा रात में जागता तो नहीं
ब्लू व्हेल
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ब्लू व्हेल गेम के टास्क रात में दिए जा रहे हैं। खास तौर से सुबह चार बजे। इस पर स्कूलों की ओर से लोगों को आगाह किया जा रहा है। लोग भी जागरुक हो रहे हैं। वे देख रहे हैं कि बच्चे रात में जाग तो नहीं रहे। कई जगह बच्चों के मोबाइल भी चेक किए गए हैं। इतना ही नहीं। कोचिंग सेंटरों से भी यह जानकारी है कि वहां भी अभिभावक पहुंचे हैं। कोचिंग सेंटर संचालकों से कहा गया है कि वे बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें।