यह है पूरा मामला
आगरा के टॉप बुलियन कारोबारियों में शुमार भाजपा नेता और एक सांसद के नजदीकी अजय अवागढ़ के फर्म पर आयकर की जांच में कई दस्तावेज मिले हैं। स्टॉक की जांच में कई बिल ऐसे पाए गए, जो शेल कंपनियों के थे। कई फर्म अहमदाबाद की मिलीं, जिनकी तस्दीक कराने पर उनके पते ही नहीं मिल रहे। कोलकाता में भी कई फर्जी फर्म को माल की सप्लाई दिखाई गई है। अजय अवागढ़ के लैपटॉप और मोबाइल के साथ कच्चे पर्चों का मिलान आयकर की टीमें कर रही हैं।
कोलकाता में अजय अवागढ़ के जो बिल मिले, उन्हें फोन पर ही यहां मिले कागजातों से सत्यापित किया जा रहा है। उसी आधार पर बुलियन की बिक्री का ब्योरा जुटाया जा रहा है। साल 2018 में आयकर विभाग की जांच शाखा को जो दस्तावेज मिले, उनसे भी मिलान किया गया है।
मोबाइल तोड़ा, डाटा हुआ रिकवर
ओम कमोडिटी के अजय अवागढ़ ने आयकर अधिकारियों को अपना मोबाइल जांच के लिए देने से पहले तोड़ दिया। इसमें कई अहम जानकारियां थीं, जिस पर आयकर अधिकारियों ने आईटी एक्सपर्ट के जरिए पूरा डाटा रिकवर करा लिया, इस वजह से भी आयकर जांच देर तक जारी रही है। जांच में कई बार रोड़े अटकाने के प्रयास किए गए। कई बार बीमारी और तबीयत खराब होने के नाम पर जांच रोकी गई तो मोबाइल और लैपटॉप के डाटा में दिक्कतें आईं।
बाजार में दुकानें तीसरे दिन भी बंद
अजय अवागढ़ के खिलाफ चल रही आयकर की जांच की आम सराफा व्यापारियों में दहशत इतनी है कि तीसरे दिन भी चौबे जी का फाटक में दुकानें बंद रहीं। सराफा व्यापारियों को डर है कि अजय अवागढ़ के पास मिल रहे कागजातों में अगर उनकी फर्म का नाम भी आ गया तो कहीं आयकर के अधिकारी उनके प्रतिष्ठान पर न आ जाएं, इसलिए प्रतिष्ठानों के शटर खुले ही नहीं है।
बाजार में अजय अवागढ़ और उनकी फर्म को लेकर कई तरह की अफवाहें भी हैं। बाजार में दोपहर बाद चर्चा चली कि बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्तियों का ब्योरा उनके लैपटॉप से मिला है, जिसमें इनर रिंग रोड के साथ अन्य शहरों में भी संपत्तियों की खरीद के कागज मिले हैं।