आगरा में व्यापारी की हत्या के मामले में बेटी का दर्द छलका। कहा कि पैसे लेने के बाद भी महिला दरोगा झूठ बोलती रही। यदि पुलिस अपना काम करती तो पापा जिंदा होते।
उत्तर प्रदेश के आगरा में कालिंदी विहार निवासी व्यापारी विनोद कुमार गुप्ता की हत्या कर शव को यमुना में फेंका गया था। पांच दिन बाद हत्या में चार आरोपी जेल भेजे गए। व्यापारी की मौत से परिवार के आंसू नहीं रुक रहे। परिजन पुलिस की कार्रवाई से आहत भी हैं। बेटी शैली एक ही बात कह रही है कि पहले दिन ही पुलिस सुन लेती तो आज पापा जिंदा होते। सिपाही से लेकर एसओ तक के हाथ जोड़े, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। शैली ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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कालिंदी विहार निवासी आर्टिफिशियल पायल कारोबारी विनोद कुमार गुप्ता की 27 जुलाई की रात घर से बुलाकर हत्या कर दी गई थी। 28 जुलाई को एत्मादपुर क्षेत्र में शव मिला था। ट्रांस यमुना पुलिस को पता नहीं चला। मंगलवार को हत्याकांड का खुलासा हुआ। परिजन ने शव की शिनाख्त की। पुलिस ने आरोपी कालिंदी विहार निवासी अनिल, रोहित, विशाल और डौकी निवासी संदीप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस की कार्रवाई से परिजन संतुष्ट नहीं हैं। बुधवार को पीड़ित परिवार से भाजपा विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह भी मिलने पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिया।
महिला दरोगा क्यों बोलती रहीं- वापस लाएंगे तुम्हारे पिता
मृतक की बेटी शैली का कहना है कि पहले दिन ही अनिल पर शक जता दिया था। उसे 29 जुलाई को थाने लेकर गए। शाम को पुलिस ने उसे छोड़ दिया। एसओ ने पूछने पर कोई कारण भी नहीं बताया। दरोगा रेखा झूठ बोलती रहीं। पिता को वापस लेकर आने की कहती रहीं। तलाश के नाम पर 50 हजार ले लिए। आखिर में उनकी लाश ही मिली। वह लोग स्मार्ट सिटी के कमांड सेंटर भी गए, लेकिन थाने से सिपाही तक नहीं भेजा गया। इस कारण फुटेज नहीं देख सके। अगर पुलिस लापरवाही नहीं करती तो पिता जिंदा होते।
रुपये लौटाने के बहाने बुलाया था
पुलिस का दावा है कि आरोपी अनिल को मृतक विनोद ने दो लाख रुपये उधार दिए थे। इस रकम का वो तकादा कर रहे थे। इसलिए अनिल ने एक महीने पहले हत्या की योजना बनाई। उसके साथियों को रुपयों की जरूरत थी। उन्हें उम्मीद थी कि विनोद की हत्या के बाद उनके डेबिट कार्ड से रकम निकाल लेंगे। आपस में बांट लेंगे। विनोद को रुपये लौटाने के बहाने बुलाया था। ऑटो में हत्या कर समोगर घाट पर नदी में शव फेंक दिया। पुलिस ने मृतक का मोबाइल बरामद किया है।
व्यापारी के बड़े भाई प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि भाई के लापता होने की सूचना डेढ़ घंटे बाद ही पिता रामजीलाल और बेटे ऋषभ ने थाने पर दी थी। एक दरोगा ने कहा कि आसपास ही गए होंगे, आ जाएंगे। वह थाना एत्माद्दौला गए। वहां भी 24 घंटे बाद गुमशुदगी दर्ज करने की कहकर घर भेज दिया।
28 जुलाई की सुबह नौ बजे थाने गए। तब मुंशी से लेकर एसओ के पास गए। मगर, संतोषजनक जवाब नहीं मिला। रात आठ बजे प्रार्थनापत्र लिया। इसमें अनिल और राजेश चौहान पर शक जताया। कोई कार्रवाई नहीं हुई। राजेश चौहान ने पूर्व में भाई को धमकी दी थी। उससे भी पुलिस को पूछताछ करनी चाहिए। उन्हें अब जान का खतरा है।
पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने कहा कि मामले में एसीपी छत्ता को जांच सौंपी गई है। उन्हें जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।