आईएमए ने संक्रमण के बिना लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन की सुविधा के फैसले की सराहना की है। जूम मीटिंग के जरिए चिकित्सकों ने इसके फायदे के बारे में चर्चा की। आईएमए का मानना है कि इससे मरीज का खर्च बचेगा और मानसिक रूप से भी बेहतर परिणाम होंगे। कोरोना के उपचार में ढाई लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं।
बिना लक्षण वाले मरीज को होम आइसोलेशन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय सामान, दवा और उसकी देखरेख के बारे में चर्चा हुई। इसके लिए निजी चिकित्सक भी इसमें अपनी सेवाएं दे सकेंगे। डॉक्टरों का मानना है कि सबसे ज्यादा मरीज को आर्थिक लाभ होगा।
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. आरएम पचौरी ने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीज को अस्पताल में 14 दिन से अधिक रहना होता है, ऐसे में उसका ढाई लाख रुपये तक खर्च हो जाता है। घर पर रहेगा तो यह पैसे बचेंगे, परिजनों के बीच रहेगा तो मानसिक हालत भी ठीक रहेगी।