वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि कोरोना से मौत भी सबसे ज्यादा बीमार बुजुर्गों की हो रही है। उनके संक्रमण होने से परिजनों को भी खतरा है, इसके चलते बुजुर्गों को बाहर जाने से रोक रहे हैं। इससे उनकी मधुमेह, बीपी समेत अन्य परेशानी की जांच भी प्रभावित हो रही है।
लोगों के मन में दहशत भी है और अपने हमउम्र के साथ मिल-बैठ भी नहीं पा रहे हैं। इससे बुजुर्गों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ गया है। फोन पर इन परेशानी को सुनकर बुजुर्गों के अलावा परिजनों को भी कैसे व्यवहार करें, इसकी भी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
ये करें परिजन
- रात-सुबह का खाने का समय न हो तो परिजन सुबह की चाय उनके साथ पीएं।
- बच्चों को बोलें कि वो अपने दादा-दादी के साथ ज्यादा समय बिताएं।
- कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों वाले समाचार से बचाएं, धार्मिक सीरियल दिखाएं।
- बाहर जाने के खतरे को मित्रवत भाषा में समझाएं, बताएं कि घर पर रहने में ही भलाई है।
- घर की गैलरी और बगीचा है तो उसमें घुमाएं, योग नियमित करने के लिए प्रेरित करें।
केस 1
दयालबाग रहने वाले 68 साल के व्यक्ति बैंक से रिटायर्ड हैं। बीपी-मधुमेह की दिक्कत है। सुबह-शाम अपने मंदिर परिसर में सीनियर सिटीजन के साथ बैठकर समय गुजारते थे, वायरस के चलते उनके बेटे बाहर जाने से रोकते हैं। वह झल्लाने लगे हैं, कभी-कभार तो दवा तक नहीं लेते।
केस 2
विजय नगर में 72 साल के बुजुर्ग को सांस रोग की परेशानी है। दवा चल रही है, सरकारी शिक्षक थे। पालीवाल पार्क तक घूमने आते, साथियों के साथ घंटों समय बिताते। अनलॉक होने पर भी बेटा उनकी सेहत-उम्र का हवाला देकर घूमने से रोकते हैं। लगातार ऐसा होने से चिड़चिड़े हो गए हैं।