अब तक की जांच में यह पाया गया है कि कई ऐसे लोग हैं, जो सामाजिक डर के चलते सरकारी केंद्रों पर कोरोना वायरस की जांच
कराने नहीं जा रहे। बुखार-खांसी, गले में खराश के लक्षण होने पर वह खुद ही रैपिड किट लाकर घर में जांच कर रहे हैं। ड्रग विभाग के
साथ आईएमए के पास भी इसकी शिकायतें पहुंची हैं।
शहर में कोरोना जांच में प्रयोग होने वाली रैपिड किट की अवैध बिक्री शुरू हो गई है। कंपनियों के एजेंट इन्हें मेडिकल स्टोरों पर पहुंचा रहे हैं। यहां से लोग खरीदकर ले जा रहे हैं और घर पर जांच करा रहे हैं। इसकी शिकायत ड्रग विभाग को मिली है। इस पर कार्रवाई के लिए अब डमी ग्राहक बनाकर मेडिकल स्टोरों पर भेजे जाएंगे।
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अब तक की जांच में यह पाया गया है कि कई ऐसे लोग हैं, जो सामाजिक डर के चलते सरकारी केंद्रों पर कोरोना वायरस की जांच कराने नहीं जा रहे। बुखार-खांसी, गले में खराश के लक्षण होने पर वह खुद ही रैपिड किट लाकर घर में जांच कर रहे हैं। ड्रग विभाग के साथ आईएमए के पास भी इसकी शिकायतें पहुंची हैं।
काली कमाई : 350 रुपये की किट, 1000 में बेच रहे
गर्भधारण की जांच करने वाली एक कंपनी के हॉकर दिल्ली से किट लाकर दवा विक्रेता और अस्पतालों को सीधे सप्लाई कर रहे हैं। इसकी कीमत 350 रुपये है, जिसे 1000 रुपये तक बेच रहे हैं। सरकारी केंद्रों पर जांच से बचने के लिए लोग इन्हें खरीद रहे हैं। औषधि विभाग से भी इसकी शिकायत की गई है। - पुनीत कालरा, आगरा फार्मा एसोसिएशन
सख्ती : किट मिली तो मेडिकल स्टोर सील कर देंगे
रैपिड किट की गैरकानूनी ढंग से बिक्री की शिकायत मिली है, ऐसे दवा विक्रेताओं को पकड़ने के लिए डमी ग्राहक भेजकर पड़ताल कर रहे हैं। बिक्री करते पकड़े जाने पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित करते हुए सील कर दिया जाएगा। - राजकुमार शर्मा, औषधि निरीक्षक
संकट : किट से घर पर जांच कराने वाले औरों को भी कर देंगे संक्रमित
दवा कंपनियां गैर कानूनी ढंग से किट बेच रही हैं। किट लाकर खुद जांच कराना खतरनाक है। रैपिड किट की जांच शत प्रतिशत दुरुस्त नहीं होती। ऐसा भी होता है कि कोई संक्रमित हो और रिपोर्ट निगेटिव आ जाए।
कई बार लक्षण होने पर भी रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, अस्पताल प्रशासन ऐसे में पीसीआर जांच से पुष्टि कराता है। घर पर जांच कराने में यह मुमकिन नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि कोई संक्रमित हो और रिपोर्ट निगेटिव आ जाए, वह इसे सही मानकर बेफिक्र रहेगा। खुद की सेहत खतरे में डालेगा और दूसरों के लिए भी खतरा बनेगा क्योंकि उसके संपर्क में आने वाले लोग संक्रमित हो सकते हैं।
सलाह : सरकारी केंद्रों पर कराएं जांच, यह मुफ्त है, नाम गोपनीय रहता है
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय का कहना है कि कोरोना वायरस के लक्षण होने पर सीधे सरकारी केंद्रों पर जांच कराएं। एंटीजन किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, यहां विशेषज्ञ भी रहते हैं।
जिसकी जांच होती है, उसका नाम भी गोपनीय रहता है। डरने की कोई बात ही नहीं है, क्योंकि अब बिना लक्षण और मामूली लक्षण वाले संक्रमितों को तो होम आइसोलेशन की सुविधा है।